इंदौर | नवरात्रि से पहले मध्य प्रदेश की सियासत में गरबा को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। महू से BJP विधायक और पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने दावा किया है कि गरबा आयोजनों के दौरान देशभर में साढ़े 4 लाख हिंदू लड़कियां मुस्लिम युवकों के साथ भाग जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इनमें से बड़ी संख्या में मामलों का असर आगे चलकर परिवार और समाज पर पड़ता है,जिससे अगले वर्ष नौ लाख प्रतिवर्ष की दर से अधर्मियों की आबादी बढ़ जाती है। पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की बात कहते हुए बेटियों को ऐसे मामलों से बचाने और जागरूक करने की जरूरत बताई।
गरबा को लेकर उषा ठाकुर का बड़ा बयान
इंदौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उषा ठाकुर ने कहा कि गरबा शक्ति की साधना का पर्व है। इसे केवल प्रदर्शन या नृत्य मंडली के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियों को ऐसी घटनाओं से बचाने और उन्हें जागरूक करने की जरूरत है।
उषा ठाकुर ने वर्ष 2003 का हवाला देते हुए दावा किया कि देशभर में गरबा आयोजनों के दौरान औसतन साढ़े चार लाख लड़कियां मुस्लिम युवकों के साथ चली जाती थीं। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में बातचीत के दौरान कोई नया आंकड़ा या स्रोत नहीं बताया।
'पहचान छिपाकर पंडालों में आते हैं'
भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा पंडालों में प्रवेश करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को पूरी तरह रोकने की जरूरत है। उनका कहना है कि गरबा आयोजनों में प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आयोजकों को सतर्क रहना चाहिए।
'लव जिहाद कानून से बढ़ी सुरक्षा'
उषा ठाकुर ने 'लव जिहाद' कानून का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस कानून से बेटियों की सुरक्षा का दायरा बढ़ा है। साथ ही उन्होंने दुर्गा उत्सव को धार्मिक साधना से जोड़ते हुए कहा कि इसके वास्तविक स्वरूप को समाज के सामने रखने की जरूरत है।
वंदे मातरम् को लेकर भी टिप्पणी
उषा ठाकुर ने कांग्रेस और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विषयों पर कई बार आपत्ति जताई जाती है। वंदे मातरम् को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी धर्म में मूर्ति पूजा की अनुमति नहीं है तो ऐसे लोग गरबा आयोजनों में क्यों शामिल होते हैं। उषा ठाकुर के इस बयान के बाद गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की एंट्री, पहचान जांच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो सकती है।