लखीसराय: नीट री-एग्जाम फर्जीवाड़े में गिरफ्तार अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एएनएमएमसीएच) के चौथे वर्ष के छात्र अर्पित सिंह और विवेक कुमार के खिलाफ कॉलेज प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। दोनों छात्रों को मेडिकल कॉलेज से निष्कासित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. लता शुक्ला द्विवेदी ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद जारी सूची में दोनों छात्रों के नाम शामिल हैं और उनके खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
मास्टरमाइंड अर्पित पर जांच एजेंसियों की नजर
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि अर्पित सिंह कथित तौर पर पूरे फर्जीवाड़े का प्रमुख सूत्रधार था। आरोप है कि वह खुद परीक्षा केंद्र के अंदर नहीं जाता था, बल्कि अपने सहयोगियों को असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने के लिए भेजता था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि वह लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल था और कई मामलों में सफल भी रहा।
मेडिकल कॉलेज पहुंची थी सीबीआई टीम
सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले सीबीआई की टीम मगध मेडिकल कॉलेज पहुंची थी और अर्पित सिंह की गतिविधियों के संबंध में विस्तृत जानकारी जुटाई थी। जांच एजेंसियों को पहले से ही उसके खिलाफ कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले थे, जिसके आधार पर उसके नेटवर्क और संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
कॉलेज प्रशासन ने शुरू की निष्कासन प्रक्रिया
प्राचार्या डॉ. लता शुक्ला द्विवेदी ने कहा कि यदि कोई छात्र धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों के माध्यम से डॉक्टर बनने का प्रयास करता है, तो यह चिकित्सा व्यवस्था और समाज दोनों के लिए गंभीर खतरा है। इसी कारण कॉलेज प्रशासन ने दोनों छात्रों के निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही मामले की अन्य स्तरों पर भी जांच कराई जाएगी।
हॉस्टल कमरों की तलाशी, अहम दस्तावेज जब्त
रविवार देर शाम लखीसराय में गिरफ्तारी के बाद पुलिस और मेडिकल कॉलेज थाना की टीम ने आरोपियों के हॉस्टल कमरों की तलाशी ली। इस दौरान एक टैबलेट, पहचान पत्र और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक आरोपी छात्र पिछले कुछ दिनों से परिसर में भी मौजूद नहीं थे।
क्या है पूरा मामला?
रविवार को आयोजित नीट री-एग्जाम के दौरान लखीसराय के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर प्रशासन ने छापेमारी कर नौ फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़ी एक निजी एजेंसी के सात कर्मचारियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार लोग असली अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे और इसके लिए बड़ी रकम का लेन-देन हुआ था। जिले के चार परीक्षा केंद्रों पर कुल 720 परीक्षार्थियों को परीक्षा में शामिल होना था, जिनमें 673 उपस्थित और 47 अनुपस्थित रहे।
नौ फर्जी परीक्षार्थी गिरफ्तार
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान केआरके हाईस्कूल केंद्र से एक, राजकीय हसनपुर हाईस्कूल से एक और केंद्रीय विद्यालय केंद्र से सात फर्जी परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया गया। डायट लखीसराय केंद्र से किसी भी फर्जी परीक्षार्थी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
पूरे नेटवर्क को खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने अब तक दो दर्जन से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। आशंका जताई जा रही है कि इनमें कई लोग बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश
जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और पुलिस अधीक्षक प्रेरणा कुमार ने मामले की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे सॉल्वर गैंग और इसके सरगना तक पहुंचा जा सके। प्रशासन ने साफ किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।