नई दिल्ली. भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने पदभार संभालने के एक दिन बाद रविवार को स्पष्ट किया कि देश की बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच वायुसेना को हर समय अभियान के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक लड़ाकू स्क्वाड्रन, रडार, वायु रक्षा इकाई और वायु सैनिक को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने में सक्षम होना चाहिए। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा के सामने उभर रहे खतरे अब पहले जैसे नहीं हैं, इसलिए तैयारी भी लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुरूप होनी चाहिए। वायुसेना की जिम्मेदारी केवल युद्ध के समय सक्रिय होने तक सीमित नहीं है, बल्कि शांति के दौरान भी निगरानी, संसाधनों की उपलब्धता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बनाए रखना जरूरी है।
'वायु' दृष्टिकोण के तहत चार प्राथमिकताएं
वायुसेना प्रमुख ने अपनी कार्ययोजना को 'वायु' नाम दिया है। इसके तहत चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इनमें सतर्कता और अभियानगत तैयारी, आत्मनिर्भरता, रणनीतिक कौशल तथा तीनों सेनाओं के बीच एकजुटता शामिल हैं। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य वायुसेना की मौजूदा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उसका विकास करना है। बदलते युद्धक्षेत्र में केवल आधुनिक लड़ाकू विमान होना पर्याप्त नहीं है; निगरानी, सूचना के त्वरित आदान-प्रदान, सटीक हथियारों और संयुक्त सैन्य अभियानों की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए वायुसेना की तैयारी को व्यापक रक्षा रणनीति से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
तकनीक बदल रही है युद्ध की तस्वीर
एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने रेखांकित किया कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ड्रोन, लंबी दूरी तक मार करने वाले सटीक हथियार, अंतरिक्ष आधारित तकनीक, साइबर हमले, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विद्युत-चुंबकीय प्रणालियां सैन्य अभियानों की प्रकृति को प्रभावित कर रही हैं। इन तकनीकों के कारण निगरानी, लक्ष्य की पहचान, संचार और हमले की रणनीति में व्यापक बदलाव आ रहा है। ऐसे में भारतीय वायुसेना को केवल मौजूदा चुनौतियों से निपटने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि अगले दशक में सामने आने वाले खतरों का अनुमान लगाकर अपनी क्षमताएं विकसित करनी होंगी। तकनीकी बदलावों के साथ प्रशिक्षण, संचालन प्रणाली और सैन्य संसाधनों का आधुनिकीकरण भी आवश्यक होगा।
लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या बढ़ाना बड़ी चुनौती
वायुसेना की प्राथमिकताओं में लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या को स्वीकृत स्तर तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक विमानों की उपलब्धता के साथ उनकी परिचालन क्षमता, रखरखाव और हथियार प्रणालियों को भी मजबूत करना होगा। वायुसेना प्रमुख ने प्रत्येक रडार और वायु रक्षा इकाई को चौबीसों घंटे सतर्क रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाकर प्रभावी जवाब दिया जा सके। मौजूदा सुरक्षा वातावरण में लड़ाकू विमानों की संख्या के साथ निगरानी नेटवर्क, मिसाइल प्रणालियों और अन्य सहायक संसाधनों की भूमिका भी निर्णायक है। इन सभी क्षमताओं का संतुलित विकास ही वायुसेना की वास्तविक युद्धक तैयारी को मजबूत कर सकता है।
स्वदेशी हथियार और तकनीक पर आत्मनिर्भरता
वायुसेना प्रमुख ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को रणनीतिक आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय तकनीक से विकसित सेंसर, सैन्य प्लेटफॉर्म और हथियार प्रणालियां वायुसेना की प्राथमिकताओं में रहेंगी। उनका जोर ऐसी परिचालन क्षमता विकसित करने पर है, जिसमें भारतीय प्रणालियों के सहारे सैन्य अभियान संचालित किए जा सकें और उनकी पर्याप्त उपलब्धता भी बनी रहे। स्वदेशी उपकरणों के उपयोग से विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता घटाने, रखरखाव को अधिक सुविधाजनक बनाने और संकट के समय आवश्यक संसाधनों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसके लिए तकनीकी गुणवत्ता, विश्वसनीयता, उत्पादन क्षमता और समयबद्ध आपूर्ति पर लगातार काम करना होगा।
तीनों सेनाओं के तालमेल से मजबूत होगी रक्षा क्षमता
आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला केवल किसी एक सेना के संसाधनों से नहीं किया जा सकता। थलसेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय से सूचनाओं का आदान-प्रदान, संसाधनों का साझा उपयोग और संयुक्त अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ाई जा सकती है। वायुसेना प्रमुख के 'वायु' दृष्टिकोण में तीनों सेनाओं की एकजुटता को प्रमुख स्थान दिया गया है। इसका महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि भविष्य के संघर्षों में हवाई शक्ति के साथ समुद्री और जमीनी मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है। स्पष्ट रणनीति, साझा तकनीकी व्यवस्था और संयुक्त प्रशिक्षण के जरिए इस तालमेल को मजबूत करना होगा। नए वायुसेना प्रमुख का संदेश यही है कि बदलते युद्धक्षेत्र में तत्परता, स्वदेशी क्षमता और संयुक्त सैन्य शक्ति ही देश की सुरक्षा को अधिक प्रभावी आधार दे सकती है।