संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो चुका है, लेकिन सदन के अंदर की कार्यवाही से ज्यादा चर्चा बाहर उन दो विधेयकों की है जो आधिकारिक लिस्ट में हैं ही नहीं। 'महिला आरक्षण बिल' और 'परिसीमन विधेयक' को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि सरकार ने अपनी शुरुआती कार्यसूची में इनका जिक्र नहीं किया है, लेकिन विपक्ष इसे 'दबाव की रणनीति' और 'अचानक पेश किए जाने' की संभावना के तौर पर देख रहा है।
संख्याबल का गणित और सस्पेंस
जानकारों का कहना है कि सरकार इन संवेदनशील विषयों पर तब तक पत्ते नहीं खोलना चाहती जब तक उसे सदन में पूर्ण समर्थन का भरोसा न मिल जाए। इसी कारण क्षेत्रीय दलों के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं। विपक्ष ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार सदन के बीच में इन विधेयकों को लाती है, तो विपक्षी दल अपनी रणनीति के साथ पूरी तरह तैयार हैं।
सर्वदलीय बैठक: सवालों पर खामोशी
सत्र से ठीक पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने इन दोनों बड़े विधेयकों पर सरकार से सीधा सवाल किया। सरकार की तरफ से स्पष्ट जवाब न मिलने पर विपक्ष इसे 'गोपनीयता' या 'अचानक बड़े फैसले' की आहट बता रहा है।
दक्षिण भारत की चिंता और महिला आरक्षण पर 'सहमति का दिखावा'
परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों के दलों ने एक साझा चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण के मानकों पर काम करने वाले राज्यों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नुकसान से बचाया जाना चाहिए। वहीं, महिला आरक्षण के मुद्दे पर लगभग सभी दल सैद्धांतिक रूप से 'हां' कह रहे हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर पुरानी सियासी खींचतान फिर से सतह पर आने के संकेत मिल रहे हैं।
इन मुद्दों से गर्म होगा सदन
मानसून सत्र सिर्फ विधेयकों तक सीमित नहीं रहने वाला है। विपक्ष ने सरकार को घेरने का पूरा खाका तैयार कर लिया है:
- NEET परीक्षा विवाद: छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा संसद की बहस का मुख्य केंद्र होगा।
- दान चोरी का मामला: राम मंदिर में कथित दान चोरी को लेकर विपक्ष ने तीखे तेवर अपना लिए हैं।
- जनहित के सवाल: महंगाई और बेरोजगारी पर भी सदन में हंगामे के आसार हैं।
सरकार ने जहां संसद के सुचारु संचालन के लिए विपक्षी सहयोग की अपील की है, वहीं विपक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बिना चर्चा के आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।