संसद मार्च से पहले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने अनशन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपना भूख हड़ताल (अनशन) समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार और विपक्ष को उनकी तीन अहम शर्तें माननी होंगी। वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों पर जवाबदेही तय करने के लिए है। वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि उनकी तबीयत चाहे जैसी भी हो, जब तक उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
संसद मार्च से पहले क्यों बढ़ा आंदोलन?
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं के खिलाफ अनशन पर हैं। संसद के मानसून सत्र से पहले उन्होंने राजनीतिक दलों से इन मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि संसद में इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा और कार्रवाई का भरोसा मिलता है, तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं।
पहली शर्त: सरकार शिक्षा व्यवस्था की नाकामी स्वीकार करे
वांगचुक की पहली मांग है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल के वर्षों में सामने आई कमियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे। उनका कहना है कि केवल घटनाओं की जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि जवाबदेही तय होना भी जरूरी है।
दूसरी शर्त: संसद तक जाने दें और सांसद भरोसा दें
दूसरी शर्त में वांगचुक ने कहा कि यदि उन्हें और उनके आंदोलन के नेतृत्व को संसद तक जाने दिया जाता है तथा विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद उनसे मिलकर यह भरोसा देते हैं कि वे इन मुद्दों को संसद में उठाएंगे, तो वह अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
तीसरी शर्त: अगर अस्पताल से बाहर नहीं जा सके तो सांसद वहीं आएं
वांगचुक ने कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों या किसी अन्य वजह से वह संसद तक नहीं पहुंच पाते, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल आकर उन्हें यह आश्वासन दें कि शिक्षा सुधार और जवाबदेही के मुद्दे संसद में प्रमुखता से उठाए जाएंगे।
सोनम वांगचुक की तीनों शर्तें एक नजर में
| शर्त | क्या मांग की गई? |
|---|---|
| पहली | सरकार शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक की जिम्मेदारी स्वीकार करे |
| दूसरी | संसद तक जाने की अनुमति मिले और सांसद मुद्दे उठाने का भरोसा दें |
| तीसरी | यदि अस्पताल से बाहर न जा सकें तो सांसद अस्पताल आकर आश्वासन दें |
अस्पताल में रोकने का लगाया आरोप
सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी तरीके से रोका गया है। उनका कहना है कि:
आने-जाने की स्वतंत्रता सीमित की गई है।
लोगों से मिलने और बातचीत करने पर भी रोक जैसी स्थिति है।
यह लोकतांत्रिक अधिकारों के अनुरूप नहीं है।
इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने क्या कहा?
इससे पहले वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी कहा था कि सोनम वांगचुक तभी अपना अनशन समाप्त करेंगे, जब विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद अस्पताल पहुंचकर यह भरोसा देंगे कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा सुधार, जवाबदेही और पेपर लीक जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।
आंदोलन का फोकस क्या है?
वांगचुक के अनुसार उनका आंदोलन मुख्य रूप से इन मुद्दों पर केंद्रित है:
शिक्षा व्यवस्था में सुधार
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता
पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई
युवाओं के भविष्य की सुरक्षा
शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करना
आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर रहेगी कि संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि राजनीतिक दल वांगचुक की मांगों पर सार्वजनिक आश्वासन देते हैं, तो उनके लंबे समय से जारी अनशन के समाप्त होने की संभावना बन सकती है।