भारत अपनी वायु सेना को और अधिक सशक्त बनाने के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस बार खास बात यह है कि इन विमानों में स्वदेशी रूप से विकसित मिसाइलों और हथियार प्रणालियों को एकीकृत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह पहल न केवल देश की रक्षा क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी नई दिशा देगी।
इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट की अनिवार्यता
इस मेगा सौदे के तहत ‘Buy And Make’ मॉडल अपनाया जा रहा है, जिसमें सरकार-से-सरकार (G-To-G) समझौते के अंतर्गत इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट (ICD) को अनिवार्य बनाया जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण तकनीकी दस्तावेज होता है, जो विभिन्न प्रणालियों और उप-प्रणालियों के बीच तालमेल और कार्यप्रणाली को परिभाषित करता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि स्वदेशी हथियार प्रणालियों को विदेशी प्लेटफॉर्म में सहजता से जोड़ा जा सके।
रक्षा अधिग्रहण परिषद की मंजूरी
रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा 12 फरवरी को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके बाद रक्षा मंत्रालय जल्द ही फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन को प्रस्ताव के लिए अनुरोध (RFP) जारी करने की तैयारी में है। यह प्रक्रिया आगे चलकर अनुबंध वार्ता का मार्ग प्रशस्त करेगी।
भारत में निर्माण से बढ़ेगा स्वदेशी योगदान
इस सौदे के तहत कुल 114 विमानों में से 18 विमान सीधे तैयार अवस्था में प्राप्त होंगे, जबकि शेष 96 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इन विमानों में 25% से अधिक स्वदेशी सामग्री के उपयोग की योजना है, जिससे देश के रक्षा उत्पादन क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
सोर्स कोड को लेकर स्थिति स्पष्ट
हाल के समय में यह चर्चा सामने आई कि विमान निर्माता कंपनी द्वारा सोर्स कोड साझा न करने के कारण सौदे में रुकावट आ सकती है। हालांकि रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी देश अपने लड़ाकू विमानों के संवेदनशील सॉफ्टवेयर कोड को साझा नहीं करता है। ये कोड विमान की रडार प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, लक्ष्य पहचान और हथियार संचालन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं, इसलिए इन्हें गोपनीय रखा जाता है।
रणनीतिक संतुलन और भविष्य की दिशा
भारत के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं, जैसे कि रूस द्वारा उन्नत लड़ाकू विमानों की पेशकश, लेकिन सोर्स कोड साझा करने के मामले में वहां भी समान नीति अपनाई जाती है। ऐसे में भारत की रणनीति स्पष्ट है कि वह विदेशी तकनीक के साथ स्वदेशी प्रणालियों का संतुलन बनाकर अपनी रक्षा शक्ति को सुदृढ़ करे। यह सौदा भविष्य में भारत को एक तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।