भारत और रूस के रक्षा सहयोग के लिए 12 और 13 फरवरी, 2026 दो अत्यंत महत्वपूर्ण दिन रहे। 12 फरवरी को यह जानकारी मिली कि एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम के बचे हुए दो स्क्वाड्रन इसी वर्ष भारत को मिल जाएंगे, और अगले ही दिन 288 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की खरीद को भी स्वीकृति प्रदान कर दी गई। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सिस्टम ने पाकिस्तानी सेना की क्षमताओं को जिस तरह ध्वस्त किया था, उसका प्रभाव आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
भारत-रूस रक्षा संबंधों में नई मजबूती
भारत और रूस के बीच दशकों से चला आ रहा रक्षा सहयोग लगातार मजबूत होता जा रहा है। इस वर्ष मिलने वाले दो स्क्वाड्रन और अब 288 मिसाइलों की खरीद भारत और रूस के बीच विश्वास, सामरिक समझ तथा दीर्घकालीन सैन्य साझेदारी को और आगे ले जाती है। यह निर्णय भारत की सुरक्षा रणनीति को वैश्विक स्तर पर अधिक सक्षम बनाता है।
रक्षा अधिग्रहण परिषद का निर्णय और सौदे का आर्थिक पहलू
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली ‘रक्षा अधिग्रहण परिषद’ (डीएसी) ने रूस से एस-400 में उपयोग होने वाली 288 मिसाइलों की खरीद के लिए ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) प्रदान कर दी है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह सौदा लगभग 10,000 करोड़ रुपये का होगा। यह राशि भारत की वायु सुरक्षा ढांचे को और अधिक उच्च स्तर पर ले जाने में योगदान देगी।
एस-400 मिसाइलों की रेंज: बहु-स्तरीय वायु सुरक्षा का आधार
एस-400 मिसाइल सिस्टम अपनी बहु-स्तरीय रेंज और सटीक निशानेबाजी के कारण विश्व के श्रेष्ठतम वायु रक्षा प्रणालियों में गिना जाता है। इसमें 400 किमी, 200 किमी, 150 किमी और 40 किमी की रेंज वाली मिसाइलें शामिल हैं। इस स्वीकृति के तहत भारत 120 कम रेंज वाली और 168 लंबी रेंज वाली मिसाइलों को फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत खरीदेगा। इससे वायु सुरक्षा की परतें और अधिक मजबूत व सक्रिय होंगी।
अत्यधिक गति और अतुलनीय सटीकता
एस-400 ट्रायंफ सिस्टम में शामिल मिसाइलों की गति 4.8 किलोमीटर प्रति सेकंड या मैक 14 तक पहुंच सकती है। यह अद्भुत गति इसे युद्धक विमानों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और बैलिस्टिक मिसाइलों को 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी इंटरसेप्ट करने में सक्षम बनाती है। इससे भारतीय वायु सीमा किसी भी संभावित खतरे के प्रति अत्यधिक सुरक्षित हो जाती है।
भारत की सामरिक शक्ति में निर्णायक उछाल
288 नई मिसाइलों की खरीद न केवल भारत की तत्काल वायु सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाती है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी महत्वपूर्ण तैयारी सुनिश्चित करती है। यह फैसला रक्षा क्षेत्र में भारत की रणनीतिक सोच, दूरदर्शिता और बढ़ते आत्मविश्वास को परिलक्षित करता है। आने वाले वर्षों में यह सौदा भारतीय वायुसेना की शक्ति को कई गुना बढ़ाने वाला सिद्ध होगा।