नई दिल्ली - भारतीय सेना अपनी युद्धक क्षमता को और अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। सेना ने मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल (MSV) की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन अत्याधुनिक वाहनों के शामिल होने से युद्ध के मैदान में मोर्टार फायरिंग पहले की तुलना में अधिक तेज, सटीक और सुरक्षित हो जाएगी। यह कदम सेना के आधुनिकीकरण अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
पारंपरिक मोर्टार सिस्टम की सीमाएं होंगी दूर
वर्तमान में सेना जिन मोर्टार सिस्टम का उपयोग करती है, उनमें फायरिंग की सटीकता काफी हद तक सैनिकों की गणनाओं और अनुभव पर निर्भर करती है। लक्ष्य की दूरी, दिशा और ऊंचाई का अनुमान लगाकर फायरिंग करनी पड़ती है, जिससे समय अधिक लगता है और गलती की संभावना भी बनी रहती है। युद्ध जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कुछ सेकंड की देरी भी बड़ा अंतर पैदा कर सकती है। ऐसे में सेना लंबे समय से ऐसी तकनीक की तलाश में थी जो मोर्टार संचालन को अधिक प्रभावी बना सके।
ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर बनेगा गेम चेंजर
नए मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल्स की सबसे बड़ी खासियत इनमें लगाया जाने वाला ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर होगा। यह सिस्टम लक्ष्य की जानकारी मिलते ही स्वतः आवश्यक गणनाएं कर लेगा और फायरिंग के लिए सही दिशा, कोण और अन्य तकनीकी आंकड़े उपलब्ध कराएगा। इससे पहली ही गोली के लक्ष्य पर सटीक लगने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। साथ ही गोला-बारूद की खपत भी कम होगी, जिससे सैन्य अभियानों की लागत और समय दोनों में बचत होगी।
युद्ध के मैदान में बढ़ेगी सुरक्षा और गति
इन स्मार्ट वाहनों के उपयोग से मोर्टार दल को बार-बार मैनुअल गणनाएं करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे सैनिकों का जोखिम कम होगा और वे तेजी से अपनी स्थिति बदलकर दुश्मन के हमलों से बच सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धों में तेजी और सटीकता सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में MSV जैसे प्लेटफॉर्म सेना की संचालन क्षमता को नई ऊंचाई देंगे।
स्वदेशी उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के तहत भारतीय सेना ने स्वदेशी कंपनियों को सूचना अनुरोध (RFI) जारी किया है। इसमें 81 मिमी और 120 मिमी मोर्टार सिस्टम के लिए व्हील्ड प्लेटफॉर्म आधारित वाहनों के विकास का प्रस्ताव शामिल है। इस पहल से न केवल सेना को अत्याधुनिक तकनीक मिलेगी, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी मजबूती मिलेगी। स्वदेशी रक्षा उद्योगों की भागीदारी से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।