कश्मीर - जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व में चल रहा नशा मुक्ति अभियान तेजी से जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। कभी आतंकवाद की छाया से प्रभावित रहे शोपियां और बारामुला जैसे इलाकों में अब युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज को जागरूक बनाने के लिए बड़े स्तर पर पदयात्राएं निकाली जा रही हैं।
100 दिन का अभियान बना जन आंदोलन
सौ दिनों तक चलने वाले इस अभियान का लगभग आधा चरण पूरा हो चुका है। खास बात यह है कि इस मुहिम को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है। सत्तापक्ष ही नहीं, विपक्षी दलों के नेता भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं और कई नेता इसमें शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं। शोपियां में आयोजित कार्यक्रम में हजारों लोगों की मौजूदगी देखने को मिली। वंदे मातरम और जन गण मन के साथ शुरू हुए कार्यक्रम के बाद खुली सड़कों पर पदयात्रा निकाली गई, जिसमें युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
नशे के साथ आतंक के नेटवर्क पर भी चोट
मनोज सिन्हा ने कहा कि नशा सिर्फ सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि आतंकवाद से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने संकेत दिया कि नशे के कारोबार के जरिए आतंक फैलाने वाले तत्वों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि जम्मू-कश्मीर को नशा मुक्त बनाना, आतंकवाद की जड़ों को कमजोर करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
पीएम मोदी और अमित शाह का मार्गदर्शन
उपराज्यपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2020 में ही देशभर में नशा मुक्ति अभियान शुरू किया था। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस मुद्दे को लेकर बेहद गंभीर हैं और लगातार निगरानी कर रहे हैं। मनोज सिन्हा ने बताया कि उन्होंने अमित शाह को पदयात्रा के जरिए लोगों को जोड़ने की अपनी योजना के बारे में बताया था, जिस पर गृह मंत्री ने भी कई सुझाव दिए।
समाज को साथ लेकर बदलाव की कोशिश
प्रशासन का मानना है कि केवल कानून व्यवस्था के जरिए नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी और जनजागरण के माध्यम से ही जम्मू-कश्मीर को नशा और आतंक दोनों से मुक्त किया जा सकता है। यही वजह है कि इस अभियान में स्कूलों, स्थानीय संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।