नदिया के कल्याणी स्थित एपीजे अब्दुल कलाम प्रेक्षागृह में मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक अहम प्रशासनिक बैठक की। इस बैठक में उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। खास बात यह रही कि तृणमूल कांग्रेस की ‘विद्रोही’ सांसद काकली घोष दस्तीदार समेत कुल 6 विधायक बैठक में शामिल हुए, जिससे बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बैठक में देगंगा के नवनिर्वाचित विधायक अनिसुर रहमान विदेश, स्वरूपनगर की बीणा मंडल और हारोआ के अब्दुल मतीन समेत अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी।
‘नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों से समन्वय हमारी प्राथमिकता’
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नए जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर तालमेल बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने ‘संकल्प पत्र’ और प्रशासनिक दृष्टिकोण को हर सरकारी विभाग तक पहुंचाना चाहती है। मुख्यमंत्री ने कहा,“हमने अल्पकालिक स्तर पर नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ समन्वय पर जोर दिया है। राज्य को किस दिशा में आगे बढ़ाना है और सरकार का विजन क्या है, यह सभी विभागों तक पहुंचना जरूरी है।”
पुरानी सरकार पर निशाना, सरकारी खर्च में कटौती का दावा
पूर्व तृणमूल सरकार की प्रशासनिक बैठकों पर निशाना साधते हुए सुवेंदु अधिकारी ने सरकारी फिजूलखर्ची को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पहले प्रशासनिक बैठकों में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते थे और कई दिनों तक भव्य आयोजन चलता था। उन्होंने कहा,“पहले एक बैठक के लिए करोड़ों रुपये खर्च होते थे, हेलीकॉप्टर तक उतरते थे। हमारी सरकार केवल जरूरी कामों पर ही खर्च कर रही है। हम वैभव या शक्ति प्रदर्शन में विश्वास नहीं रखते।”
काकली को बुलाने पर क्या बोले मुख्यमंत्री?
विपक्षी सांसदों और विधायकों को बैठक में बुलाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने अपने पुराने अनुभव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में उन्हें कभी किसी प्रशासनिक बैठक में आमंत्रित नहीं किया गया था, इसलिए उन्होंने शुरुआत से ही सभी को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई। सुवेंदु अधिकारी ने कहा,“हमने पहले ही तय किया था कि कुछ खास सांसदों को बुलाएंगे। हम चाहते हैं कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार का लाभ बंगाल के आम लोगों तक पहुंचे। हमारी सरकार सिर्फ चुनाव के समय काम दिखाने में विश्वास नहीं करती।”
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई अटकलें
काकली घोष दस्तीदार की मौजूदगी और मुख्यमंत्री के बयान के बाद बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं की सरकारी बैठकों में भागीदारी को लेकर राजनीतिक विश्लेषक इसे आने वाले समय के संकेत के तौर पर देख रहे हैं।