भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। बीते 145 दिनों में नगर निगम की 8 टेस्टिंग लैब में शहर के विभिन्न इलाकों से 20,236 पानी के सैंपलों की जांच की गई, जिनमें बड़ी संख्या में नमूने दूषित पाए गए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 9,311 सैंपल झुग्गी बस्ती क्षेत्रों से लिए गए थे, जहां पानी की गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब पाई गई। अवधपुरी, वाजपेयी नगर, खानूंगांव और अर्जुन नगर जैसे इलाकों में पानी पीने योग्य नहीं है।
झुग्गी इलाकों में सबसे खराब हालात
लगातार मिल रही शिकायतों के बीच नगर निगम द्वारा 5,573 पाइपलाइन लीकेज सुधारे गए, इसके बावजूद पानी में गंदगी और बैक्टीरिया की मौजूदगी बनी हुई है।केवल मई महीने में ही सीएम हेल्पलाइन और मेयर हेल्पलाइन पर 83 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से प्रशासन ने 74 के निराकरण का दावा किया है।
ई-कोलाई की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
लैब रिपोर्ट में शहर के कई इलाकों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया है, जो सीधे तौर पर सीवेज मिक्सिंग की ओर इशारा करता है। यह बैक्टीरिया मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।
इन 4 इलाकों की रिपोर्ट ने उड़ाए होश
वाजपेयी नगर:
ई-कोलाई के साथ टीडीएस 156 mg/L और मैग्नीशियम 11.42 mg/L दर्ज
अवधपुरी:
ई-कोलाई मौजूद, टीडीएस 323 mg/L, पीएच वैल्यू 7.78
खानूंगांव:
ई-कोलाई के साथ टीडीएस 248 mg/L, टोटल हार्डनेस 145 mg/L
अर्जुन नगर:
ई-कोलाई मौजूद, टीडीएस 104 mg/L, पीएच वैल्यू 7.48
एक माह में तेजी से गिरा जलस्तर
शहर को बड़ा तालाब, और केरवा डैम से पानी की सप्लाई होती है।
कोलार डैम का जलस्तर फिलहाल फुल टैंक लेवल से 9 मीटर नीचे है और क्षमता का सिर्फ 48 प्रतिशत पानी ही बचा है।
वहीं, बड़े तालाब का जलस्तर सामान्य 1666.80 फीट के मुकाबले घटकर 1659.70 फीट पर पहुंच गया है।
एक्सपर्ट व्यू: गंभीर बीमारियों का खतरा
डॉक्टर पूर्वा गोहिया के अनुसार,
“पानी में ई-कोलाई की मौजूदगी का मतलब है कि सीवेज का गंदा पानी पीने की सप्लाई लाइन में मिल रहा है। इससे पीलिया, टाइफाइड और पेट के गंभीर संक्रमण तेजी से फैल सकते हैं।”
निष्कर्ष:
भोपाल में पेयजल संकट अब केवल सुविधा का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।