नई दिल्ली : 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के यूपीआई (UPI) मर्चेंट भुगतानों पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बातचीत में साफ कहा कि यह कोई टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है और इसका बोझ ग्राहकों की जेब पर बिल्कुल नहीं डाला जाएगा। उन्होंने बताया कि यह शुल्क केवल व्यापारियों (मर्चेंट्स) द्वारा ही देय होगा और 2,000 रुपये से कम के किसी भी भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
"यह सरकारी टैक्स नहीं, न ही इसका पैसा खजाने में जाएगा"
विपक्ष और विभिन्न व्यापारी संगठनों द्वारा जताए जा रहे अंदेशों पर वित्त मंत्री ने विराम लगाते हुए कहा, "यह कोई सरकारी टैक्स नहीं है और न ही इसकी वसूली भारत सरकार की संचित निधि (Consolidated Fund of India) में जा रही है। यह सेवा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI), एग्रीगेटर, सर्विस प्रोवाइडर, पीओएस मशीन प्रदाताओं और मर्चेंट बैंक द्वारा प्रदान की जाती है। 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR का भुगतान मर्चेंट करेगा और इसे ग्राहकों पर ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।"सरकारी सूत्रों के अनुसार, एकत्र किए गए MDR का 40% ग्राहकों के बैंक को, 30% पेमेंट गेटवे को, 20% UPI ऐप को और 10% UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को मिलेगा। इस संग्रह में से एक भी पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा।
15 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम: जानें कितना लगेगा चार्ज?
NPCI द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए ढांचे के तहत:
- 0.4% चार्ज: 2,000 रुपये से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) भुगतान पर 0.4 प्रतिशत का MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है।
- व्यक्तिगत लेन-देन मुफ्त: दो व्यक्तियों के बीच (Person-to-Person) होने वाले सभी UPI लेन-देन पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे।
- छोटे व्यापारियों को राहत: ऐसे छोटे व्यापारी जो QR कोड के माध्यम से महीने में 1 लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करते हैं, उन्हें इस चार्ज से पूरी तरह मुक्त रखा गया है।
- विशेष सेवाएं: रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट शुल्क लगेगा। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड के लिए 0.02% दर तय की गई है।
व्यापारी संगठनों (CTI) की चिंता और वापसी की मांग
दूसरी ओर, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। CTI के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि देश के लगभग 6 करोड़ दुकानदारों और व्यापारियों पर इससे अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। CTI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के कुल 314 लाख करोड़ रुपये के लेन-देन में से 198 लाख करोड़ रुपये मर्चेंट पेमेंट के थे। 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन की संख्या भले ही कुल का केवल 4% हो, लेकिन मूल्य के लिहाज से यह लगभग 131 लाख करोड़ रुपये है।संगठन ने आशंका जताई है कि MDR लागू होने के बाद बड़े भुगतानों के लिए UPI का उपयोग 50% तक गिर सकता है और लोग दोबारा नकद लेन-देन की ओर लौट सकते हैं।
GST काउंसिल 7 अक्टूबर को करेगी विचार
Mर्चेंट फीस पर लगने वाले 18 प्रतिशत जीएसटी (GST) पर 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, MDR संग्रह का 5 प्रतिशत हिस्सा छोटे व्यापारियों के बीच UPI को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष फंड में जमा किया जाएगा। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) जल्द ही इस संबंध में जागरूकता अभियान चलाकर फैली हुई भ्रांतियों को दूर करेगा।