पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब भारत के टूरिज्म और एविएशन सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) की नई रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी पर्यटकों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे देश के टूरिज्म, होटल-रेस्तरां और हवाई यात्रा उद्योग को करीब 18,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर रेस्तरां कारोबार पर पड़ा है, जहां लगभग 10 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं और हर महीने कारोबार में भारी गिरावट देखी जा रही है।
जीडीपी में टूरिज्म का अहम योगदान
भारत की जीडीपी में टूरिज्म और होटल इंडस्ट्री का लगभग 8 प्रतिशत योगदान है और यह सेक्टर 4 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। वर्ष 2025 में इस क्षेत्र ने मजबूत रिकवरी दर्ज की थी, लेकिन 2026 की शुरुआत में पश्चिम एशिया के तनाव ने स्थिति को फिर प्रभावित किया है।
हवाई यात्रा सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट के मुताबिक, एविएशन सेक्टर पर सबसे गहरा असर पड़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुई हैं, कुछ हवाई क्षेत्र बंद होने से रूट बदलने पड़े हैं, जिससे उड़ानों का समय 2 से 4 घंटे तक बढ़ गया है। इसके चलते ईंधन खर्च में भी वृद्धि हुई है, जो एयरलाइंस की कुल लागत का 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा है।मिडिल ईस्ट रूट बाधित होने के कारण टिकटों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
विदेशी पर्यटकों में गिरावट
वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण विदेशी पर्यटक अब यात्रा को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं। भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है, जबकि भारतीय यात्री अब थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम जैसे नजदीकी देशों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।होटल उद्योग अभी घरेलू पर्यटन के सहारे चल रहा है, हालांकि विदेशी पर्यटकों की कमी और बढ़ती लागत के कारण मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।
रेस्तरां कारोबार पर असर
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। आयात, परिवहन और बिजली की लागत बढ़ने से छोटे और मध्यम रेस्टोरेंट व्यवसाय सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
घरेलू पर्यटन बना सहारा
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय घरेलू पर्यटन ही सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है। देश के भीतर घूमने वाले लोग होटल, यात्रा और फूड सेक्टर को स्थिर बनाए हुए हैं।
सरकार से सिफारिशें
PHDCCI ने सरकार से सुझाव दिया है कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर टैक्स में राहत दी जाए, होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर को कर में छूट मिले, सस्ते लोन की सुविधा दी जाए और नए अंतरराष्ट्रीय हवाई मार्ग विकसित किए जाएं। साथ ही वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने और भारत की वैश्विक मार्केटिंग को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद भारत का टूरिज्म सेक्टर घरेलू मांग के दम पर स्थिर रह सकता है और सही नीतियों के साथ आने वाले समय में तेजी से रिकवरी कर सकता है।