कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सियासी अखाड़े से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद गहरे संकट से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पैरों के नीचे से अब जमीन पूरी तरह खिसकती नजर आ रही है। बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) ने कोलकाता, दक्षिण 24 परगना और हावड़ा जिले को लेकर एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक बुलाई। इस बैठक में शामिल होने के लिए टीएमसी के बागी और दिग्गज विधायकों का एक-एक कर राज्य सचिवालय 'नवान्न' पहुंचना शुरू हो गया है।
नवान्न पहुंचने वाले नेताओं की सूची में बगावत का बिगुल फूंकने वाले ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा तो उम्मीद के मुताबिक शामिल थे ही, लेकिन उनके साथ आए अन्य नामों ने राजनीतिक विश्लेषकों और खुद ममता कैंप को स्तब्ध कर दिया है।
फिरहाद हकीम और कुणाल घोष की एंट्री से सब हैरान
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की इस प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लेने के लिए टीएमसी के सबसे भरोसेमंद चेहरों में शुमार फिरहाद हकीम, कुणाल घोष, अशोक देब, जावेद खान और नयना बंद्योपाध्याय जैसे कद्दावर नेता भी नवान्न पहुंचे हैं।
गौरतलब है कि बागी नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने मंगलवार को ही मीडिया के सामने साफ कर दिया था कि वे विधानसभा में एक "रचनात्मक विपक्ष" (Constructive Opposition) की भूमिका निभाना चाहते हैं, न कि सिर्फ विरोध के लिए विरोध करना चाहते हैं। अब बाकी टीएमसी विधायकों का भी उसी सुर में सुर मिलाते हुए मुख्यमंत्री की बैठक में पहुंचना साफ संकेत दे रहा है कि ममता बनर्जी की पार्टी में दरार अब खाई में बदल चुकी है।
खाई में गिरी TMC, 'हस्ताक्षर विवाद' ने बिगाड़ा खेल
विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद भी शायद टीएमसी का शीर्ष नेतृत्व इतना लाचार और असहाय महसूस नहीं कर रहा था, जितना इस वक्त कर रहा है। विधानसभा के भीतर 'साइन स्कैम' (विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर का विवाद) ने पार्टी के बचे-कुचे वजूद को भी तहस-नहस कर दिया है। इस विवाद के बाद पार्टी साफ तौर पर दो धड़ों में बंट गई है।
बुधवार को ही बागी गुट के करीब 35 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को चिट्ठी सौंपकर ममता बनर्जी को दलनेत्री बनाए रखने की बात तो कही, लेकिन संसदीय दल के नेता के तौर पर मुख्यमंत्री के बजाय ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रख दिया। इस टीम में जावेद खान, शिउली साहा, संदीपन साहा, सबीना यास्मिन और मुख्य सचेतक के रूप में अखरुज्जमान को आगे किया गया है।
सुवेंदु के बयान के बाद बढ़ी थी तल्खी, निशाने पर अभिषेक बनर्जी
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब खुद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा के फर्जी हस्ताक्षर मामले में मुखर होते हुए ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा का नाम लिया था। मुख्यमंत्री ने बताया था कि इन्हीं नेताओं की शिकायत के आधार पर पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।
इस घटनाक्रम के तुरंत बाद टीएमसी ने नाटकीय अंदाज में ऋतब्रत और संदीपन को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी से निकाले जाने के बाद इन दोनों नेताओं ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ऐसे नाजुक वक्त पर एक तरफ विधानसभा में अलग गुट की अर्जी देना और दूसरी तरफ नवान्न जाकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की बैठक में बैठना—यह साफ दिखाता है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर आया यह भूकंप अब पूरी पार्टी को जमींदोज करने के लिए काफी है।