कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब एक औपचारिक और बेहद बड़ी टूट (Vertical Split) के रूप में सामने आ चुकी है। बुधवार को केवल कागजी या सोशल मीडिया की बगावत नहीं दिखी, बल्कि बागी विधायकों ने सशरीर विधानसभा पहुंचकर अपनी ताकत का ऐसा प्रदर्शन (Show of Strength) किया जिसने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों को हिलाकर रख दिया है।
बुधवार दोपहर होते-होते विधानसभा परिसर में नाटकीय मोड़ आ गया। निष्कासित टीएमसी विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा के नेतृत्व में बागी खेमे के करीब 30 से 35 विधायक एक के बाद एक विधानसभा परिसर के भीतर दाखिल हुए।
नौशेर अली कक्ष में सीक्रेट मीटिंग, फिर स्पीकर के पास पहुंचे बागी
विधानसभा पहुंचते ही इन सभी बागी विधायकों ने 'नौशेर अली कक्ष' (Nousher Ali Room) में एक बंद कमरे में मैराथन बैठक की। इस गुप्त बैठक में सरकार को घेरने और पार्टी पर कब्जे की अगली रणनीति तैयार की गई। बैठक खत्म होते ही यह पूरा काफिला सीधे विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) रथींद्र बोस के चैंबर में दाखिल हुआ और उन्हें 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक आधिकारिक पत्र सौंप दिया।
चिट्ठी का खेल: 'ममता बनर्जी सुप्रीम, लेकिन हमारा नेता ऋतब्रत'
स्पीकर रथींद्र बोस को सफेद कागज पर जो पत्र सौंपा गया है, उसकी भाषा बेहद चालाकी से तैयार की गई है। पत्र में साफ लिखा गया है कि वे ममता बनर्जी को ही अपनी मुख्य दलनेत्री (Party Leader) मानते हैं। लेकिन, इसके साथ ही उन्होंने बड़ा खेल करते हुए विधानसभा के भीतर संसदीय दल के नेता (Legislative Party Leader) के तौर पर मुख्यमंत्री के बजाय ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नाम को नॉमिनेट कर दिया है।
इसके अलावा बागी गुट ने निम्नलिखित नेताओं की नई टीम का प्रस्ताव दिया है:
उप-दलनेता (Deputy Leaders): जावेद खान, शिउली साहा, संदीपन साहा और सबीना यास्मिन।
मुख्य सचेतक (Chief Whip): अखरुज्जमान।
पूर्व मंत्री रथीन घोष की एंट्री से बढ़ा सस्पेंस, बागियों का दावा- दो-तिहाई बहुमत हमारे पास
ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के साथ विधानसभा में प्रवेश करने वालों में शिउली साहा, रियाज हुसैन, इमानी विश्वास, सबीना यास्मिन और अरुणाभ सेन जैसे बड़े चेहरे शामिल थे। हावड़ा जिले के भी तीन विधायक इस गुट के साथ मजबूती से खड़े दिखे।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली और महत्वपूर्ण मौजूदगी मध्यमग्राम के विधायक और राज्य के पूर्व मंत्री रथीन घोष की रही। गौर करने वाली बात यह है कि हाल ही में नगर पालिका भर्ती घोटाले में केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (ED) ने रथीन घोष को तलब किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रथीन घोष का ममता कैंप छोड़ इस बागी गुट में आना विद्रोही खेमे को भारी मजबूती दे गया है।
विधानसभा के भीतर जाने से पहले निष्कासित विधायक संदीपन साहा ने बेहद आत्मविश्वास के साथ मीडिया से कहा:"हमारे साथ तृणमूल कांग्रेस के जीते हुए कुल विधायकों में से दो-तिहाई (Two-Thirds) से भी ज्यादा सदस्यों का समर्थन हासिल है। आंकड़ा हमारे पक्ष में है।"
संदीपन साहा (बागी नेता) फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के कमरे से लेकर पूरे कॉरिडोर में सुरक्षा और राजनीतिक तनाव चरम पर है। टीएमसी के इस घरेलू विद्रोह ने राज्य सरकार के स्थायित्व पर भी सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।