नई दिल्ली. देशभर में मानसून की प्रगति इस वर्ष अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाई है। मुंबई सहित कई क्षेत्रों में वर्षा की शुरुआत होने के बावजूद कुल वर्षा का स्तर सामान्य से काफी कम बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो प्रभाव के कारण मानसूनी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, जिससे कई राज्यों में बारिश का वितरण असमान दिखाई दे रहा है। इसका सीधा असर कृषि गतिविधियों पर पड़ रहा है और विशेष रूप से खरीफ सीजन की बुवाई प्रभावित होने लगी है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
खरीफ फसलों पर मंडराने लगा संकट
कम वर्षा का सबसे अधिक प्रभाव खरीफ फसलों की बुवाई पर दिखाई दे रहा है। दलहन, तिलहन और अन्य वर्षा आधारित फसलों के लिए समय पर पर्याप्त बारिश अत्यंत आवश्यक होती है। बारिश में देरी और कम वर्षा के कारण कई क्षेत्रों में किसान अभी तक बुवाई शुरू नहीं कर पाए हैं, जबकि जिन क्षेत्रों में बुवाई हो चुकी है वहां भी अंकुरण और शुरुआती वृद्धि को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में वर्षा की स्थिति नहीं सुधरी तो उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था दोनों पर दिखाई देगा।
किसानों के लिए सरकार ने तैयार किया वैकल्पिक रोडमैप
बदलती परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए जिला स्तर पर आकस्मिक कृषि योजना तैयार कर ली है। कृषि मंत्रालय और मौसम विभाग के बीच हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों में विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की गई है। सरकार का मानना है कि पिछले वर्षों की तुलना में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जिससे स्थिति को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यदि मानसून और अधिक विलंबित होता है तो किसानों को कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही कृषि विभाग स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराएगा।
खाद्यान्न भंडार से मिलेगी सुरक्षा की ढाल
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में खाद्यान्न की उपलब्धता को लेकर फिलहाल किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। गेहूं और चावल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, जो किसी भी आपात स्थिति में बाजार और उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है। अधिकारियों का कहना है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो आयात जैसे विकल्प भी खुले रखे जाएंगे। यह रणनीति खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़ने देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मुंबई में राहत की बारिश, लेकिन खतरा अभी बरकरार
जहां एक ओर देश के कई हिस्से पर्याप्त वर्षा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, वहीं मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में मानसून ने राहत पहुंचाई है। लंबे समय से गर्मी और जल संकट का सामना कर रहे लोगों को वर्षा से राहत मिली है। हालांकि मौसम विभाग ने तेज हवाओं, बिजली गिरने और भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए चेतावनी जारी की है। निचले इलाकों में जलभराव और समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका के कारण प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। मछुआरों को भी कुछ दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
राजधानी में मानसून का इंतजार, प्रशासन सतर्क
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अभी भी मानसून की औपचारिक दस्तक का इंतजार जारी है। हालांकि गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां मौसम में बदलाव के संकेत दे रही हैं। प्रशासन ने संभावित वर्षा और जलभराव की समस्याओं से निपटने के लिए पहले से तैयारी शुरू कर दी है। महत्वपूर्ण मार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। बरसात के मौसम में यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए सड़कों की खुदाई और अन्य निर्माण गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
मौसम की चुनौती के बीच कृषि और अर्थव्यवस्था पर नजर
मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। ऐसे में इसकी कमजोर प्रगति केवल किसानों तक सीमित चिंता नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव ग्रामीण आय, खाद्य उत्पादन और बाजार की गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दो सप्ताह बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे। यदि मानसून सक्रिय होता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन यदि बारिश में लंबा अंतराल बना रहा तो सरकार को अपने वैकल्पिक कृषि प्रबंधन और राहत योजनाओं को और व्यापक स्तर पर लागू करना पड़ सकता है।