पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सड़कों और इलाकों के नामों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा कि शहर में अब मुगलों, पठानों या ब्रिटिश शासकों के नाम पर किसी सड़क या इलाके का नाम नहीं रखा जाएगा।
नामों की समीक्षा के लिए बनेगी समिति
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि सड़कों और क्षेत्रों के नामों की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से नामों की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें देगी।
सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने पर छिड़ी बहस
यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब Kolkata Municipal Corporation (KMC) ने पार्क सर्कस क्षेत्र स्थित सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया। इस फैसले को लेकर विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिली।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्ष के नेता Ritabrata Banerjee ने सड़क का नाम बदलने पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार इतिहास से छेड़छाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी के नाम पर नहीं था।
ऐतिहासिक संदर्भ पर जोर
विपक्ष का तर्क था कि इस सड़क का नाम 1932 में प्रसिद्ध चिकित्सक और University of Calcutta के पहले मुस्लिम कुलपति सर हसन सुहरावर्दी के सम्मान में रखा गया था। वहीं, उनका यह भी कहना था कि इसका संबंध मौलाना ओबैदुल्ला सुहरावर्दी के परिवार से था, न कि उन राजनीतिक विवादों से जिन्हें लेकर अक्सर हुसैन शहीद सुहरावर्दी का नाम चर्चा में आता है।
राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस तेज
सरकार के इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और नामकरण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में समिति की सिफारिशों के आधार पर कोलकाता की कई सड़कों और इलाकों के नामों में बदलाव देखने को मिल सकता है।