कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी (CM Suvendu Adhikari) के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने पहले कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion) की तैयारी पूरी कर चुकी है। इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे बड़ा बदलाव शिक्षा विभाग (Education Department) में देखने को मिलने वाला है। सुवेंदु सरकार अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के मॉडल को बदलकर वाममोर्चा (Left Front) के पुराने फॉर्मूले पर लौटने जा रही है, जिसके तहत शिक्षा विभाग को दो हिस्सों में बांटकर दो अलग-अलग पूर्ण मंत्री बनाए जाएंगे।
वाम अमले की तर्ज पर बंट जाएगा शिक्षा विभाग
सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा व्यवस्था में तेजी लाने के लिए सरकार इसे दो भागों—'विद्यालय शिक्षा' (School Education) और 'उच्च शिक्षा' (Higher Education) में विभाजित करेगी।पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो वाममोर्चा के शासनकाल में प्राथमिक व स्कूल शिक्षा की जिम्मेदारी लंबे समय तक कांति बिस्वास और बाद में पार्थ दे के पास थी, जबकि उच्च शिक्षा का जिम्मा सत्यसाधन चक्रवर्ती और सुदर्शन रायचौधुरी जैसे नेताओं ने संभाला था। साल 2011 में तृणमूल सरकार के आने के बाद शुरुआत में रवींद्रनाथ भट्टाचार्य (स्कूल शिक्षा) और ब्रात्य बसु (उच्च शिक्षा) मंत्री बने थे, लेकिन बाद में दोनों विभागों को मिलाकर एक 'शिक्षा विभाग' कर दिया गया था। अब सुवेंदु सरकार फिर से पुरानी व्यवस्था बहाल करने जा रही है।
जीतने वाले जिलों के विधायकों को मिलेगा इनाम
कैबिनेट विस्तार की सूची लगभग अंतिम रूप ले चुकी है और इसी हफ्ते इसे राजभवन भेजा जा सकता है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल का आकार छोटा ही रहेगा, लेकिन इसमें कई चौंकाने वाले नाम शामिल हो सकते हैं।
कैबिनेट विस्तार की मुख्य बातें:
जिन जिलों में भाजपा ने एकतरफा और क्लीन स्वीप जैसी जीत हासिल की है, वहां के विधायकों को पुरस्कार के रूप में मंत्री पद दिया जाएगा।
नए मंत्रियों की सूची में राज्य के हर क्षेत्र और जाति-जनजाति (Tribal) के प्रतिनिधित्व का विशेष ध्यान रखा गया है।
गृह (Home) और सूचना एवं संस्कृति (Information & Culture) जैसे बड़े और महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी खुद अपने पास रखेंगे।
अनुभव की कमी को देखते हुए 'प्रशासनिक दक्षता' पर जोर
चूंकि वर्तमान में विजयी विधायकों में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, तापस राय और निशीथ प्रमाणिक को छोड़कर बाकी किसी के पास राज्य या केंद्र में मंत्री रहने का अनुभव नहीं है, इसलिए मंत्रियों के चयन में 'प्रशासनिक काम संभालने की क्षमता' और राजनीतिक समीकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
बता दें कि बीते 9 मई को सुवेंदु अधिकारी ने ब्रिगेड परेड ग्राउंड के मंच से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदीराम टुडू ने मंत्री पद की शपथ ली थी। वर्तमान मंत्रियों पर काम का बोझ कम करने के लिए उनके कुछ विभाग नए मंत्रियों को सौंपे जाएंगे। इसमें कई नए पूर्ण मंत्रियों के साथ राज्य मंत्रियों (Mos) के नाम भी तय कर लिए गए हैं।