हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। आमतौर पर लोग चैत्र और शारदीय नवरात्रि के बारे में अधिक जानते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार साल में कुल चार बार नवरात्रि आती है।
इनमें से चैत्र और अश्विन माह की नवरात्रि को सामान्य नवरात्रि कहा जाता है, जबकि माघ और आषाढ़ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि को साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए विशेष माना जाता है।
15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि इस साल 15 जुलाई से शुरू होगी और 23 जुलाई तक चलेगी।
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 14 जुलाई को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर होगा और इसका समापन 15 जुलाई को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर गुप्त नवरात्रि का पहला दिन 15 जुलाई माना जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाली इस साधना में मां दुर्गा के साथ दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है।
सामान्य नवरात्रि से क्यों अलग होती है गुप्त नवरात्रि?
- सामान्य नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। वहीं, गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष महत्व होता है।
- गुप्त नवरात्रि मुख्य रूप से तंत्र साधना, मंत्र साधना और आध्यात्मिक सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान साधक विशेष नियमों का पालन करते हुए देवी की उपासना करते हैं।
- सामान्य नवरात्रि की तरह गुप्त नवरात्रि में बड़े सार्वजनिक आयोजन कम देखने को मिलते हैं। इसे अधिकतर व्यक्तिगत साधना और भक्ति का पर्व माना जाता है।
गुप्त नवरात्रि में होती है इन 10 महाविद्याओं की पूजा
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान दस महाविद्याओं की आराधना की जाती है। इनमें शामिल हैं:
- मां काली
- मां तारा
- मां त्रिपुर सुंदरी
- मां भुवनेश्वरी
- मां छिन्नमस्ता
- मां त्रिपुर भैरवी
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मां मातंगी
- मां कमला
मान्यता है कि इन देवियों की पूजा से साधक को आध्यात्मिक शक्ति और मन की एकाग्रता प्राप्त होती है।
साधना और आत्मचिंतन के लिए खास माना जाता है यह समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि का समय ध्यान, पूजा-पाठ और आत्मचिंतन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान साधक मंत्र जाप, ध्यान और देवी आराधना के जरिए आध्यात्मिक उन्नति का प्रयास करते हैं। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को विशेष रूप से साधना और भक्ति का पर्व माना जाता है, जिसमें श्रद्धालु श्रद्धा और नियमों के साथ देवी की उपासना करते हैं।