आज होली भाई दूज का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह त्योहार भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। भाई दूज साल में दो बार मनाई जाती है—एक बार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को और दूसरी बार होली के बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया को। इसे भ्राता द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इस विशेष दिन बहनें अपने भाइयों को घर आमंत्रित कर उनका सम्मान करती हैं। वे भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं, भाई भी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं, जिससे यह पवित्र रिश्ता और मजबूत होता है।
तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि 4 मार्च को शाम 4 बजकर 48 मिनट पर शुरू हुई थी और आज शाम 5 बजकर 03 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में बहनें सुबह से लेकर शाम 5:03 बजे तक किसी भी शुभ समय में अपने भाई को तिलक कर सकती हैं।
भाई दूज की तिलक विधि
- सबसे पहले एक साफ पूजा की थाली तैयार करें और उसमें दीपक जलाएं।
- केसर, लाल चंदन और गंगाजल मिलाकर तिलक तैयार करें और उसे चांदी या पीतल की कटोरी में रखें।
- तिलक लगाने से पहले इसे भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें।
- ‘ऊं नमो नारायणाय’ मंत्र का 27 बार जाप करें।
- इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेश और विष्णु जी को तिलक लगाएं।
- भाई को उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके चौकी पर बैठाएं।
- बहन भाई के माथे पर तिलक लगाए और आरती उतारे।
- उसकी लंबी आयु, सुख और समृद्धि की कामना करें।
- अंत में दोनों एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर पर्व की शुभकामनाएं दें।
होली भाई दूज का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि परिवार में प्रेम और एकता को भी और अधिक सुदृढ़ करता है।
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