हिंदू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करने और व्रत रखने से मन को शांति मिलती है और मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नवरात्रि के मौके पर अक्सर महिलाओं के दिमाग में एक सवाल जरूर आता है कि क्या नवरात्रि से पहले या फिर नवरात्रि के दौरान पीरियड्स हो जाएं तो क्या व्रत रख सकते हैं। आचार्यों ने इस विषय पर स्पष्ट मार्गदर्शन दिया है।
पीरियड्स में व्रत रखने की अनुमति
आचार्य के अनुसार इस बार पावन नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है। मान्यता है कि इस बार मां भगवती हाथी पर सवार होकर भक्तों के घर आएंगी। ऐसे शुभ समय में मां भगवती की पूजा किस तरह करनी चाहिए और महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए यह जानना जरूरी है। आचार्य के मुताबिक अगर नवरात्रि में पूजन करने से पहले अथवा पूजन के बीच में अगर महिलाओं को पीरियड्स हो जाए तो वह नवरात्रि व्रत रख सकती हैं। शास्त्रों के मुताबिक अगर नवरात्रि का व्रत शुरू करने के बाद महिलाओं को पीरियड्स हो जाएं तो इससे व्रत का फल समाप्त नहीं होता।
मानसिक पूजा का शास्त्रीय प्रावधान
शास्त्रों में ऐसी स्थिति के लिए मानसिक पूजा का नियम बताया गया है क्योंकि शरीर भी भगवान की बनाई हुई रचना है इसलिए प्राकृतिक शारीरिक स्थिति को लेकर मन में किसी तरह का अपराधबोध नहीं रखना चाहिए। आचार्य के मुताबिक महिलाएं पीरियड्स के दौरान भी नवरात्रि का व्रत रख सकती हैं। हालांकि इस समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। मानसिक पूजा करें। आप मन ही मन में मानसिक रूप से मां भगवती को स्नान धूप दीप जलाएं। मां भगवती को केसर युक्त चंदन लगे हरिद्रा युक्त चंदन लगे और मंत्र जाप कर सकते हैं। मां भगवती की मूर्ति को स्पर्श न करें।
ध्यान रखने योग्य नियम
इन दिनों में मूर्ति कलश मंदिर और पूजा की किसी भी सामान को छूना नहीं चाहिए। इस समय केवल आप व्रत करें और बैठकर मानसिक पूजा करें। शारीरिक अशुद्धता की स्थिति में बाहरी पूजा सामग्री से दूरी बनाए रखना शास्त्रसम्मत है। मानसिक आराधना से व्रत का फल समान रूप से प्राप्त होता है। महिलाओं को इस प्राकृतिक प्रक्रिया को लेकर किसी तरह का अपराध बोध नहीं रखना चाहिए। नवरात्रि के बाकी नियमों जैसे सात्विक आहार और संयम का पालन जारी रखा जा सकता है।
व्रत का फल और आस्था
शास्त्रीय दृष्टिकोण के अनुसार पीरियड्स की स्थिति में भी नवरात्रि व्रत का महत्व बना रहता है। मानसिक पूजा के माध्यम से भक्ति भाव बनाए रखने पर जोर दिया गया है। मां दुर्गा की आराधना में शुद्ध भाव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। शारीरिक स्थिति के बावजूद मन से की गई पूजा स्वीकार होती है। नवरात्रि के नौ दिनों में महिलाओं को अपनी सुविधा और शास्त्रीय मार्गदर्शन के अनुसार व्रत और पूजा का पालन करना चाहिए। आस्था और अनुशासन दोनों का संतुलन बनाए रखना ही सच्चा साधना मार्ग है।