वास्तु शास्त्र में घर के मंदिर के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है। यह दिशा देवताओं की दिशा मानी जाती है और यहीं पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सर्वाधिक होता है। यदि आप अपने घर में मंदिर बनाने की योजना बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि मंदिर की ऊंचाई हमेशा उसकी चौड़ाई से अधिक हो। इससे ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर रहता है और स्थान पवित्र बना रहता है।
मंदिर में रखी मूर्तियों और चित्रों का चयन
पूजा घर में केवल देवी-देवताओं की मूर्तियां या तस्वीरें ही रखनी चाहिए। किसी भी मृत व्यक्ति की तस्वीर या वस्तु को मंदिर में रखने से ऊर्जा बाधित होती है। टूटी-फूटी मूर्तियों को तुरंत मंदिर से बाहर कर देना चाहिए, क्योंकि उन्हें रखना अशुभ माना जाता है। मूर्ति और चित्रों का स्वरूप शुद्ध, संपूर्ण और शांत भाव वाला होना चाहिए ताकि साधना में एकाग्रता बनी रहे।
पूजा घर का स्थान और आसपास की साफ-सफाई
कभी भी मंदिर को सीढ़ियों के नीचे, बाथरूम के पास या किचन से सटाकर नहीं बनाना चाहिए। ऐसे स्थानों पर नकारात्मक कंपन अधिक होते हैं जिससे पूजा का प्रभाव कम होता है। मंदिर के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान जमा होने से भी बचना चाहिए। पूजा स्थान जितना स्वच्छ और व्यवस्थित होगा उतनी ही सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित होगी।
पूजा के समय दिशा और बैठने का सही तरीका
मंदिर ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे। इन दिशाओं में पूजा करने से मन शांत रहता है और ध्यान की शक्ति बढ़ती है। यदि किसी कारणवश घर में एक ही कमरा है और वहीं पूजा करनी पड़ती है तो रात में मंदिर को पर्दे से ढक देना शुभ माना गया है।
पूजा घर का रंग और मूर्तियों की संख्या
मंदिर की दीवारों या पृष्ठभूमि का रंग हल्का पीला, क्रीम, हल्का नारंगी या अन्य शुभ रंग होना चाहिए। गहरे रंगों का प्रयोग मंदिर में नहीं करना चाहिए। घर के मंदिर में एक ही देवता की दो मूर्तियां अथवा चित्र नहीं रखने चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा असंतुलित होती है और साधक का ध्यान बंटता है। मूर्तियों का आकार भी बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए; सामान्यतः अंगूठे से बड़ी मूर्ति रखने से बचने की सलाह दी जाती है।
सही पूजा स्थान से घर में आती है सकारात्मक ऊर्जा
वास्तु के अनुसार बनाए गए पूजा घर से घर का वातावरण शुद्ध रहता है, मन शांत होता है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। यदि मंदिर में सही दिशा, सही रंग और सही मूर्तियों का चयन किया जाए तो न केवल पूजा का प्रभाव बढ़ता है बल्कि घर में आध्यात्मिक ऊर्जा भी सशक्त होती है।
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