घर का मंदिर वह पवित्र स्थल है जहां से पूरे परिवार की मानसिक शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति का प्रवाह होता है। शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक मूर्ति की अपनी विशिष्ट ऊर्जा होती है, जो सीधे घर के वातावरण को प्रभावित करती है। यदि मंदिर में रखी गई मूर्तियों की ऊर्जा गृहस्थ जीवन के अनुकूल नहीं होती, तो यह तरक्की में रुकावट, मानसिक अशांति और धन हानि का कारण बन सकती है।
खंडित या टूटी हुई मूर्तिया क्यों होती हैं अशुभ
वास्तु शास्त्र का स्पष्ट नियम है कि पूजाघर में खंडित या टूटी हुई मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। चाहे मूर्ति में हल्की सी दरार ही क्यों न हो, उसे पूजा योग्य नहीं माना जाता। ऐसी मूर्तियां जीवन में बाधाएं, तनाव और कार्यों में असफलता का संकेत देती हैं। शास्त्रों के अनुसार इन्हें सम्मानपूर्वक किसी पवित्र नदी या जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
देवी-देवताओं के रौद्र रूप से क्यों बचें
घर के मंदिर में हमेशा शांत, सौम्य और आशीर्वाद देने वाले स्वरूपों की ही स्थापना करनी चाहिए। देवी काली का उग्र रूप, भगवान शिव का तांडव स्वरूप या हनुमान जी का लंका दहन करते हुए चित्र गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते। मान्यता है कि ऐसे रौद्र रूप घर के सदस्यों के स्वभाव में क्रोध, तनाव और असंतुलन बढ़ाते हैं।
एक ही देवता की अधिक मूर्तिया बन सकती हैं बाधा
श्रद्धा के कारण कई लोग एक ही देवी-देवता की अनेक मूर्तियां मंदिर में रख लेते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार एक ही देवता की तीन या उससे अधिक मूर्तियां या चित्र एक स्थान पर नहीं होने चाहिए। इससे घर में गृह-क्लेश, निर्णयों में भ्रम और आर्थिक स्थिरता में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
आमने-सामने रखी मूर्तियों का दोष
मंदिर में मूर्तियों की दिशा और व्यवस्था का विशेष महत्व है। मूर्तियां कभी भी एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं होनी चाहिए। विशेष रूप से गणेश जी की पीठ दिखाई देना अत्यंत अशुभ माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि उनकी पीठ में दरिद्रता का वास होता है। मूर्तियों का मुख हमेशा साधक की ओर या सामने की दिशा में होना चाहिए।
पूर्वजों की तस्वीरें मंदिर में क्यों न रखें
कई घरों में देवताओं के साथ ही दिवंगत पूर्वजों की तस्वीरें भी रख दी जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार देवता और पितर दोनों पूजनीय हैं, लेकिन उनके स्थान अलग-अलग होने चाहिए। मंदिर में पूर्वजों की तस्वीर रखने से देव-दोष लग सकता है, जिससे घर की उन्नति और लक्ष्मी का आगमन प्रभावित होता है।
युद्ध और विनाश दर्शाने वाले चित्रों से बचें
महाभारत युद्ध, असुर वध या विनाश दर्शाने वाले उग्र चित्र पूजा कक्ष में नहीं रखने चाहिए। ऐसी तस्वीरें मानसिक अशांति, पारिवारिक विवाद और नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती हैं। मंदिर में केवल शांति, करुणा और मंगल भाव दर्शाने वाले चित्र ही उपयुक्त माने गए हैं।
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