अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को दिए गए दान को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। विश्व सिंधी सेवा संगम के इंटरनेशनल प्रेसिडेंट डॉ. राजू मनवानी ने दावा किया है कि वर्ष 2021 में सिंधी समाज की ओर से लगभग 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की 200 किलो चांदी मंदिर ट्रस्ट को दान की गई थी, लेकिन आज तक न तो उसकी रसीद उपलब्ध कराई गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि उस चांदी का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया गया। इस दावे के सामने आने के बाद दान प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
वैश्विक अभियान से जुटाई गई थी चांदी
डॉ. मनवानी के अनुसार यह दान किसी एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि विश्वभर में बसे सिंधी समुदाय के सहयोग से चलाए गए एक विशेष अभियान का परिणाम था। उन्होंने बताया कि भारत के अलावा कई अन्य देशों में रहने वाले सिंधी समाज के लोगों ने भी इस अभियान में उत्साहपूर्वक योगदान दिया था। दान के रूप में 1-1 किलो वजन की 200 चांदी की ईंटें अयोध्या में सौंपी गई थीं। ऐसे में समुदाय के लोगों के मन में यह स्वाभाविक जिज्ञासा है कि उनकी श्रद्धा और योगदान का उपयोग किस रूप में किया गया।
रसीद नहीं मिलने से बढ़ा असंतोष
डॉ. मनवानी ने कहा कि उनका मुख्य मुद्दा रसीद प्राप्त करना नहीं है, बल्कि दान के उपयोग की जानकारी मिलना है। उनका कहना है कि जब किसी धार्मिक और राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के लिए समाज से सहयोग लिया जाता है, तब दानदाताओं को यह जानने का अधिकार होना चाहिए कि उनके योगदान का उपयोग किस प्रकार किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दान देने वालों को किसी प्रमुख समारोह में आमंत्रित नहीं किया गया और न ही उन्हें बाद में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
मीडिया रिपोर्टों के बाद और गहरे हुए सवाल
हाल के दिनों में दान और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सामने आई कुछ रिपोर्टों के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। डॉ. मनवानी ने कहा कि मीडिया में सामने आ रही खबरों के कारण दान देने वाले लोग लगातार उनसे संपर्क कर रहे हैं और जवाब मांग रहे हैं। चूंकि उन्होंने स्वयं इस अभियान का नेतृत्व किया था, इसलिए समुदाय के लोग उनसे यह जानना चाहते हैं कि उनकी ओर से दिए गए योगदान का अंतिम उपयोग क्या हुआ। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
एसआईटी जांच से सच सामने आने की उम्मीद
विश्व सिंधी सेवा संगम ने इस मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) पर भरोसा जताया है। डॉ. मनवानी ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर विश्वास है कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन फिलहाल एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार करेगा और उसके निष्कर्षों के आधार पर आगे की प्रतिक्रिया देगा।
दान व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा मुद्दा दान प्रणाली में पारदर्शिता का बनकर उभरा है। धार्मिक संस्थानों को मिलने वाले बड़े दान के संबंध में दानदाताओं को नियमित जानकारी उपलब्ध कराने, रसीद जारी करने तथा उपयोग का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने जैसी व्यवस्थाओं की मांग तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समय में डिजिटल ट्रैकिंग और सार्वजनिक ऑडिट जैसे उपाय धार्मिक संस्थानों के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत कर सकते हैं।
श्रद्धा के साथ जवाबदेही भी जरूरी
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके निर्माण में देश-विदेश से लोगों ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया है। ऐसे में दान से जुड़े किसी भी विवाद का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि भावनात्मक स्तर पर भी पड़ता है। यही कारण है कि दानदाता समुदाय पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की जांच और उससे निकलने वाले निष्कर्षों पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट कर सकते हैं।