उत्तर प्रदेश में जून की तपती दोपहरें और लगातार बढ़ती गर्मी लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई हैं। ऐसे में दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल पहुंचने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि उत्तर प्रदेश में बारिश कब शुरू होगी। किसानों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की नजरें मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर टिकी हुई हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार प्रदेश में मानसून का प्रवेश चरणबद्ध तरीके से होगा और जून के तीसरे सप्ताह से इसकी गतिविधियां तेजी से बढ़ने लगेंगी।
केरल से पूर्वांचल तक मानसून का सफर
दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में प्रवेश करने के बाद सामान्यतः दो प्रमुख शाखाओं के माध्यम से आगे बढ़ता है। इनमें बंगाल की खाड़ी शाखा उत्तर प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष भी मानसून बिहार के रास्ते पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगा। मानसून की गति अगले कुछ दिनों में बनने वाली मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी, लेकिन वर्तमान संकेत बताते हैं कि पूर्वांचल सबसे पहले बारिश का स्वागत करेगा।
मानसून के आगमन के साथ तापमान में गिरावट, उमस में कमी और कृषि गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। विशेष रूप से धान जैसी खरीफ फसलों की बुआई के लिए यह बारिश अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पूर्वांचल में सबसे पहले बरसेंगे बादल
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बलिया, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी और चंदौली जैसे पूर्वी जिलों में 15 से 20 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है। इन क्षेत्रों में मानसून के प्रवेश के साथ ही अच्छी वर्षा होने की संभावना जताई जा रही है।
पूर्वांचल के जिलों में मानसूनी हवाओं का प्रभाव अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई देता है क्योंकि बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी सबसे पहले इसी क्षेत्र तक पहुंचती है। यही वजह है कि हर वर्ष प्रदेश में मानसून की पहली दस्तक इसी भूभाग में दर्ज होती है।
मध्य उत्तर प्रदेश को करना पड़ सकता है इंतजार
राजधानी लखनऊ सहित प्रयागराज, अयोध्या, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी और फतेहपुर जैसे जिलों में मानसून के 20 से 25 जून के बीच पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि इस अवधि से पहले प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो सकती हैं, जिनके तहत गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना रहती है।
मध्य उत्तर प्रदेश में मानसून के पहुंचने के बाद तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके साथ ही लंबे समय से गर्मी और लू का सामना कर रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
पश्चिमी जिलों तक पहुंचने में लगेगा थोड़ा और समय
मेरठ, सहारनपुर, गाजियाबाद, नोएडा, बागपत, अलीगढ़, मथुरा, आगरा और आसपास के पश्चिमी जिलों में मानसून जून के अंतिम सप्ताह में सक्रिय होने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पहुंचते-पहुंचते मानसून की गति और तीव्रता कई मौसमी कारकों पर निर्भर करती है।
इस दौरान कुछ स्थानों पर आंधी, गरज-चमक और छिटपुट बारिश की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि व्यापक और लगातार वर्षा का दौर जून के अंतिम सप्ताह अथवा जुलाई के आरंभ में अधिक प्रभावी रूप से शुरू होने की संभावना है।
प्री-मानसून गतिविधियां देंगी राहत
मानसून के औपचारिक आगमन से पहले प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं। तेज हवाएं, धूल भरी आंधी, बादलों की आवाजाही और हल्की से मध्यम बारिश जैसी घटनाएं अगले कुछ दिनों में देखने को मिल सकती हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ये गतिविधियां मानसून के आगमन की पूर्व सूचना होती हैं और इनके कारण तापमान में अस्थायी गिरावट दर्ज की जा सकती है। इससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की संभावना है।
इस बार मानसून को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
इस वर्ष मानसून के आगमन को लेकर शुरुआत से ही अनिश्चितता बनी रही। पहले अनुमान था कि मानसून मई के अंतिम सप्ताह में भारत में प्रवेश कर जाएगा, लेकिन इसकी प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही और जून के पहले सप्ताह में इसकी औपचारिक दस्तक दर्ज हुई। इसके साथ ही वैश्विक मौसमीय परिस्थितियों, विशेषकर अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर भी विशेषज्ञों की निगाहें बनी हुई हैं।
मौसम विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस वर्ष देश में मानसूनी वर्षा सामान्य से कुछ कम रहने की आशंका व्यक्त की गई है। यदि ऐसा होता है तो इसका प्रभाव कृषि, जल संसाधनों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि मानसून की वास्तविक स्थिति आगामी हफ्तों में स्पष्ट होगी और मौसम विभाग लगातार इसकी निगरानी कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के लिए फिलहाल राहत की खबर यही है कि मानसून की दस्तक अब दूर नहीं है। जून के दूसरे पखवाड़े से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने लगेंगी और इसके साथ ही भीषण गर्मी के दौर पर विराम लगने की उम्मीद है।