लखनऊ - उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने दो बार फॉर्म-6 जमा करने पर चार वोटर आईडी कार्ड मिलने के दावे को गलत बताया है। कार्यालय के मुताबिक, संबंधित मतदाता ने दो नहीं, बल्कि कुल चार आवेदन जमा किए थे और उसे चार मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) मिले थे। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर किए गए दावे के जवाब में CEO कार्यालय ने संबंधित यूजर को तथ्यों की जांच करने और अपनी पोस्ट में सुधार करने की सलाह दी।
‘एक खरीदें, एक मुफ्त पाएं’ जैसी कोई योजना नहीं
CEO कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब देते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग की ऐसी कोई योजना नहीं है, जिसके तहत एक आवेदन पर अतिरिक्त वोटर आईडी मुफ्त में मिलती हो। कार्यालय ने पोस्ट करने वाले यूजर को अपने तथ्यों की दोबारा जांच करने की सलाह दी।
कार्यालय ने कहा कि फॉर्म-6 दो बार जमा करने पर चार मतदाता पहचान पत्र मिलने का दावा गलत है। उसके अनुसार, संबंधित व्यक्ति ने कुल चार आवेदन दिए थे। इस जवाब के जरिए कार्यालय ने सोशल मीडिया पर प्रसारित दावे और अपने रिकॉर्ड के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की।
आवेदन के रेफरेंस नंबर देने की चुनौती
CEO कार्यालय ने संबंधित यूजर से उन दो आवेदनों के रेफरेंस नंबर साझा करने को कहा, जिनके बारे में दावा किया गया था कि मतदाता ने उन्हें जमा किया था। कार्यालय ने कहा कि बाकी दो आवेदनों के रेफरेंस नंबर वह स्वयं उपलब्ध करा सकता है।
इस कदम के जरिए कार्यालय ने मामले की जांच रिकॉर्ड के आधार पर करने की बात कही। आवेदन संख्या और संबंधित दस्तावेज सामने आने पर यह समझने में मदद मिल सकती है कि मतदाता ने कितने फॉर्म जमा किए थे और कितने पहचान पत्र जारी हुए।
कई आवेदन जमा होने की समस्या पुरानी
CEO कार्यालय ने यह भी स्वीकार किया कि एक ही व्यक्ति की ओर से कई आवेदन जमा होने और एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र जारी होने की समस्या पुरानी है। कार्यालय के अनुसार, चुनाव आयोग इस तरह के मामलों की पहचान करने के लिए ईसीआईनेट के माध्यम से समय-समय पर ‘डी-डुप्लीकेशन’ यानी दोहराव की जांच करता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड में एक ही व्यक्ति से संबंधित कई प्रविष्टियों की पहचान करना है। कार्यालय ने कहा कि आयोग ऐसी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे किसी व्यक्ति की ओर से एक से अधिक आवेदन जमा किए जाने पर उनकी पहचान आवेदन के समय ही की जा सके।
आवेदन के समय ही दोहराव पकड़ने की तैयारी
CEO कार्यालय के मुताबिक, चुनाव आयोग की योजना आवेदन प्रक्रिया के दौरान ही एक से अधिक फॉर्म जमा किए जाने की स्थिति का पता लगाने की है। कार्यालय ने उम्मीद जताई कि आयोग जल्द ही इस व्यवस्था को लागू करने के लक्ष्य तक पहुंच जाएगा।
ऐसी व्यवस्था से मतदाता सूची और पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया में दोहराव रोकने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसकी प्रभावशीलता का आकलन लागू होने के बाद सामने आने वाले आंकड़ों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर किया जा सकेगा।
सोशल मीडिया पोस्ट में सुधार करने की सलाह
CEO कार्यालय ने यूजर से चुनाव आयोग के बारे में गलत जानकारी प्रसारित न करने और लोगों के बीच संवैधानिक संस्था को लेकर अविश्वास पैदा करने से बचने की अपील की। कार्यालय ने कहा कि संबंधित दावे की वास्तविक जानकारी साझा कर दी गई है, इसलिए यूजर को मामले की ठीक से जांच करके अपनी पोस्ट में सुधार करना चाहिए या उसे हटा देना चाहिए।
यह मामला मतदाता पहचान पत्र जारी करने की प्रक्रिया और सोशल मीडिया पर चुनाव संबंधी दावों की तथ्य-जांच के महत्व को सामने लाता है। ऐसे मामलों में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आवेदन के रेफरेंस नंबर, आधिकारिक रिकॉर्ड और निर्वाचन अधिकारियों के स्पष्टीकरण की जांच करना जरूरी है।