लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां जारी हैं, लेकिन पिछड़ा वर्ग आयोग के सर्वे में देरी ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर नई चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के 75 जिलों में से अब तक केवल 50 जिलों में ही सर्वे और जनसुनवाई का काम पूरा हुआ है, जबकि 25 जिलों में यह प्रक्रिया अभी बाकी है। ऐसे में आयोग के लिए तय समयसीमा के भीतर आरक्षण से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करना मुश्किल माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आयोग सरकार से रिपोर्ट सौंपने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है। यदि ऐसा होता है तो पंचायत चुनाव की तैयारियों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
75 जिलों में से 50 का सर्वे पूरा, 25 जिलों में काम बाकी
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण की प्रक्रिया को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से जिलों में सर्वे कराया जा रहा है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य पंचायतों में पिछड़े वर्ग की आबादी और उनकी सामाजिक स्थिति से जुड़े आंकड़े जुटाना है। आयोग को प्रदेश के सभी 75 जिलों का दौरा कर स्थानीय स्तर पर जानकारी एकत्र करनी है। अब तक 50 जिलों में सर्वे और जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं, बाकी 25 जिलों में अभी भी अधिकारियों को सर्वे और जनसुनवाई का काम पूरा करना है। इसके अलावा एकत्र किए गए आंकड़ों का विश्लेषण और उनका सत्यापन भी जरूरी है। इसी वजह से आयोग के सामने समय पर पूरी रिपोर्ट तैयार करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
आयोग 20 नवंबर तक नहीं सौंप पाएगा रिपोर्ट!
पिछड़ा वर्ग आयोग को 20 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस समयसीमा पर सवाल उठने लगे हैं। अभी एक चौथाई से ज्यादा जिलों में सर्वे का काम पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में बाकी जिलों का दौरा, जनसुनवाई और आंकड़ों का संकलन करने में अतिरिक्त समय लग सकता है। रिपोर्ट तैयार करने से पहले सभी जिलों से मिली जानकारियों की जांच भी करनी होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोग फिलहाल 20 नवंबर तक रिपोर्ट सौंपने की स्थिति में नहीं है। यदि काम इसी गति से आगे बढ़ता है तो रिपोर्ट में और देरी हो सकती है। हालांकि, आयोग की ओर से अंतिम समयसीमा को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
रिपोर्ट के लिए सरकार से तीन महीने का अतिरिक्त समय मांग सकता है आयोग
सर्वे में हो रही देरी के बीच आयोग की ओर से सरकार से अतिरिक्त समय मांगने की संभावना भी जताई जा रही है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, आयोग कम से कम तीन महीने का समय और मांग सकता है। यदि ऐसा होता है तो रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ जाएगी। मौजूदा परिस्थितियों में 31 दिसंबर 2026 से पहले रिपोर्ट सौंपना भी मुश्किल बताया जा रहा है। हालांकि, अतिरिक्त समय देने का फैसला पूरी तरह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में होगा। आयोग की ओर से औपचारिक प्रस्ताव भेजे जाने के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जा सकेगा। फिलहाल इस संबंध में सरकार या आयोग की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
हाईकोर्ट के तीन महीने के आदेश से बढ़ सकती है प्रशासनिक चुनौती
उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश भी इस पूरे मामले में अहम माना जा रहा है। दरअसल, 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश दिया था। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट में देरी होने से चुनावी तैयारियों के सामने नई चुनौती आ सकती है। पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण तय करना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके आधार पर आगे की तैयारियां की जाती हैं। यदि रिपोर्ट समय पर नहीं आती है तो सरकार के सामने आगे की प्रक्रिया को निर्धारित समय में पूरा करने का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, आयोग की रिपोर्ट में देरी होने से हाईकोर्ट का आदेश अपने आप न तो रद्द होता है और न ही उसकी समयसीमा बदलती है। इस मामले में आगे अदालत और सरकार की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
आरक्षण रिपोर्ट आने के बाद शुरू होगी आगे की प्रक्रिया
पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनाव की तैयारियों में अगला चरण शुरू होगा। सबसे पहले सरकार आयोग की सिफारिशों और सर्वे के आंकड़ों की समीक्षा करेगी। इसके आधार पर पंचायतों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। आरक्षण तय होने के बाद संबंधित पंचायत सीटों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इसके बाद चुनाव से जुड़ी अन्य प्रशासनिक तैयारियों को पूरा किया जाएगा। मतदाता सूची, मतदान केंद्रों और चुनावी व्यवस्थाओं से जुड़े काम भी महत्वपूर्ण होंगे। चुनाव कार्यक्रम घोषित करने और मतदान कराने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की होगी। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट को पंचायत चुनाव की आगे की प्रक्रिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
यूपी पंचायत चुनाव 2026 की तारीखों पर अब भी सस्पेंस
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कब होंगे, इसे लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है। अभी तक राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। एक तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का निर्देश है, तो दूसरी तरफ पिछड़ा वर्ग आयोग के सर्वे में देरी की खबर सामने आ रही है। ऐसे में चुनाव की तैयारियों को तय समय में पूरा करना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अब सबकी नजर आयोग के बाकी जिलों में होने वाले सर्वे पर टिकी है। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि आयोग सरकार से अतिरिक्त समय मांगता है या नहीं। सरकार का फैसला और राज्य निर्वाचन आयोग की अगली कार्रवाई ही पंचायत चुनाव की तस्वीर को स्पष्ट करेगी।