नई दिल्ली | मेडिकल में पोस्ट ग्रेजुएशन (MD/MS) की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए NEET-PG दाखिला प्रक्रिया में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के अनुसार, 2027 से NEET-PG में मौजूदा परसेंटाइल आधारित व्यवस्था की जगह रैंक आधारित सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने इस बदलाव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। हालांकि, इस व्यवस्था का अंतिम स्वरूप और लागू होने की प्रक्रिया आगे की सुनवाई तथा संबंधित सरकारी नियमों पर निर्भर करेगी।
NEET-PG 2027 में क्या बदल सकता है?
3 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में दाखिला प्रक्रिया को लेकर कई अहम सुझाव दिए गए हैं।
- परसेंटाइल की जगह रैंक: पात्रता तय करने में परसेंटाइल के बजाय उम्मीदवार की ऑल इंडिया रैंक (AIR) को आधार बनाने का सुझाव दिया गया है।
- कट-ऑफ में अत्यधिक छूट पर रोक: केवल खाली सीटें भरने के लिए न्यूनतम योग्यता मानकों को बहुत नीचे नहीं गिराने की सिफारिश की गई है।
- खाली सीटों के लिए उपाय: प्री-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल विषयों की खाली सीटें भरने के लिए फीस कम करने और सर्विस बॉन्ड से छूट देने जैसे विकल्प सुझाए गए हैं।
- काउंसलिंग में देरी रोकना: हर साल दाखिला प्रक्रिया में होने वाली देरी दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गई है।
क्यों पड़ी NEET-PG के नियम बदलने की जरूरत?
- पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की पीजी सीटें खाली रहने पर NEET-PG की कट-ऑफ में बड़ी कटौती की जाती रही है। इससे परीक्षा की न्यूनतम योग्यता और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे।
- 2023: खाली सीटें भरने के लिए कट-ऑफ घटाकर शून्य परसेंटाइल कर दी गई थी। इससे माइनस मार्क्स पाने वाले कुछ अभ्यर्थी भी काउंसलिंग के लिए पात्र हो गए थे।
- 2024: जनरल कैटेगरी के लिए कट-ऑफ 15 परसेंटाइल और आरक्षित वर्गों के लिए 10 परसेंटाइल तक घटाई गई।
- 2025-26 सत्र: जनवरी 2026 में NBEMS ने कट-ऑफ में फिर बड़ी कमी की। जनरल कैटेगरी की कट-ऑफ 50वीं से घटाकर 7वीं परसेंटाइल और SC/ST/OBC वर्गों के लिए शून्य परसेंटाइल कर दी गई।
- कट-ऑफ में लगातार हो रही कटौती के बाद मेडिकल पीजी दाखिले की पात्रता और शिक्षा के मानकों को लेकर विवाद बढ़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि पीजी मेडिकल दाखिले के समय हर साल कट-ऑफ और खाली सीटों को लेकर समस्या सामने आती है, जिससे अभ्यर्थियों को परेशानी होती है। कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति ने अब अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश कर दी है। रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं सहित संबंधित पक्षों को समय दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।
मेडिकल स्टूडेंट्स पर क्या होगा असर?
अगर रैंक आधारित व्यवस्था लागू होती है, तो NEET-PG में दाखिले की पात्रता तय करने का तरीका बदल सकता है। उम्मीदवारों को अपनी ऑल इंडिया रैंक के आधार पर प्रतिस्पर्धा करनी होगी। साथ ही, केवल सीटें खाली रहने के कारण न्यूनतम योग्यता में बड़ी छूट मिलने की संभावना सीमित हो सकती है। हालांकि, खाली प्री-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल सीटों के लिए फीस में कमी और सर्विस बॉन्ड से छूट जैसे सुझाव लागू हुए तो इन विषयों में दाखिले को प्रोत्साहन मिल सकता है। फिलहाल यह विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और प्रस्तावित बदलावों का मामला है। NEET-PG 2027 के लिए अंतिम नियम, पात्रता और कट-ऑफ की स्थिति आधिकारिक अधिसूचना तथा सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।