देहरादून:उत्तराखंड सरकार ने चारधाम यात्रा मार्गों पर घोड़े-खच्चरों के संचालन को लेकर नई और सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। यह नियम तत्काल प्रभाव से केदारनाथ, यमुनोत्री, हेमकुंड साहिब और आदि कैलाश मार्गों पर लागू होंगे। इसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ पशुओं के कल्याण को सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य जांच और माइक्रोचिपिंग होगी अनिवार्य
नई व्यवस्था के तहत हर घोड़े-खच्चर का पंजीकरण जिला प्रशासन और जिला पंचायत के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए पशुओं की स्वास्थ्य जांच, ग्लैंडर्स टेस्ट, कान में ईयर टैग और माइक्रोचिपिंग अनिवार्य कर दी गई है। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र केवल 45 दिन तक वैध रहेगा, जिसके बाद दोबारा जांच कराना जरूरी होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यात्रा मार्गों पर केवल स्वस्थ पशु ही कार्य में लगाए जाएं।
रात में संचालन पर पूरी तरह रोक
एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले घोड़े-खच्चरों का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा। टोकन सिस्टम भी सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक ही लागू रहेगा। खराब मौसम जैसे बारिश, ओलावृष्टि या बर्फबारी की स्थिति में पशुओं को यात्रा मार्ग पर नहीं उतारा जाएगा। एक मालिक अधिकतम दो पशु रख सकेगा और एक दिन में केवल एक टोकन मिलेगा।
हर किलोमीटर पर पानी और चारे की व्यवस्था
नई गाइडलाइन में पशु कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। हर किलोमीटर पर स्वच्छ पानी, चारा और इलेक्ट्रोलाइट उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। पशुओं को चोट से बचाने के लिए हल्की और वाटरप्रूफ काठियों का उपयोग किया जाएगा। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और निगरानी के लिए हर जिले में अधिकारी और पशु चिकित्सक की तैनाती की जाएगी।
पशु पर अत्याचार पर सख्त कार्रवाई
नई एसओपी में सबसे सख्त प्रावधान पशु क्रूरता को लेकर किए गए हैं। पशुओं पर अधिक भार डालना, बीमार या घायल पशु से काम लेना, तेज दौड़ाना, मारपीट करना या माइक्रोचिप से छेड़छाड़ करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे मामलों में पशु मालिक का लाइसेंस रद्द किया जाएगा और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।