उत्तरकाशी . उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल के निकट करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर 8 पर्वतारोही भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की आशंका के बीच फंस गए हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की 1 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, पर्वतारोहियों का दल गंगोत्री से केदारताल की यात्रा पर निकला था, लेकिन वापसी के दौरान मौसम बिगड़ने और रास्ते में बर्फ जमने के कारण उसके 8 सदस्य आगे नहीं बढ़ सके। इस दल के साथ मौजूद 4 सहायक कर्मचारी सुरक्षित गंगोत्री लौटने में सफल रहे। पर्वतारोहियों के फंसे होने की सूचना मिलने के बाद बचाव एजेंसियों ने तलाश अभियान शुरू किया। हालांकि, कई प्रयासों के बावजूद 1 नवंबर दोपहर तक लापता पर्वतारोहियों का कोई पता नहीं चल पाया था।
30 अक्टूबर को एजेंसी ने प्रशासन को दी सूचना
रिपोर्ट के मुताबिक, सोल सीकर ट्रैकिंग एजेंसी ने 30 अक्टूबर को प्रशासन को जानकारी दी थी कि पर्वतारोहियों का एक दल गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ है। वापसी के दौरान भारी हिमपात और हिमस्खलन जैसी परिस्थितियां बनने से दल के 8 सदस्य रास्ते में फंस गए, जबकि उनके साथ चल रहे 4 सहायक कर्मचारी किसी तरह सुरक्षित गंगोत्री पहुंच गए। सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव एजेंसियों ने घटनाक्रम की जानकारी जुटानी शुरू की। पर्वतारोहियों की वास्तविक स्थिति, उनके पास उपलब्ध संसाधनों और उनके संभावित ठिकाने का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ऊंचाई वाले इस दुर्गम क्षेत्र में मौसम की प्रतिकूलता और बर्फ से ढके रास्तों के कारण बचाव अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
एसडीआरएफ की टीम को भोज खरक तक नहीं मिला सुराग
पर्वतारोहियों की तलाश के लिए 31 अक्टूबर को राज्य आपदा प्रतिवादन बल की 5 सदस्यीय टीम ने अभियान चलाया। टीम भोज खरक तक पहुंची और आसपास के क्षेत्र में खोजबीन की, लेकिन उसे पर्वतारोहियों का कोई सुराग नहीं मिला। इसी दिन उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के हेलीकॉप्टर ने भी केदारताल क्षेत्र में हवाई सर्वेक्षण किया। हालांकि, हवाई निगरानी के दौरान भी न तो पर्वतारोही दिखाई दिए और न ही उनके किसी सामान का पता चला। दुर्गम पहाड़ी भूभाग, भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की आशंका के कारण जमीन पर तलाशी अभियान को आगे बढ़ाना आसान नहीं है। ऐसे में बचाव दलों को मौसम और सुरक्षा परिस्थितियों का आकलन करते हुए खोज का दायरा बढ़ाना पड़ रहा है।
एनडीआरएफ के जवानों को लेकर हेलीकॉप्टर ने भरी उड़ान
1 नवंबर को बचाव अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के हेलीकॉप्टर ने देहरादून के सहस्रधारा से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के 2 जवानों को हर्षिल पहुंचाया। पर्वतारोहियों के साथ गए 4 सहायक कर्मचारियों में से एक व्यक्ति भी हवाई तलाशी अभियान में शामिल हुआ। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, 1 नवंबर को दोपहर 1:30 बजे तक हेलीकॉप्टर ने संबंधित क्षेत्र के 2 चक्कर लगाकर हवाई निगरानी की थी। इसके बावजूद न तो कोई पर्वतारोही दिखाई दिया और न ही उनका कोई सामान नजर आया। हवाई सर्वेक्षण में सफलता नहीं मिलने के कारण उनकी स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। बचाव दल अब उपलब्ध सूचनाओं और मौसम की परिस्थितियों के आधार पर आगे की रणनीति बना रहे हैं।
जिला प्रशासन की निगरानी में कई विभाग जुटे
पूरे बचाव अभियान की निगरानी जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से की जा रही है। जिलाधिकारी और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी लगातार अभियान की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान के कर्मचारियों के साथ पुलिस, सेना, चिकित्सा और राजस्व विभाग के कर्मियों को भी हर्षिल हेलीपैड पर तैनात किया गया है। इन विभागों की मौजूदगी का उद्देश्य जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता, चिकित्सा व्यवस्था और बचाव दलों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना है। ऊंचाई वाले इलाके में तापमान, मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए अभियान में हर कदम सावधानी से उठाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता फंसे हुए सभी पर्वतारोहियों तक पहुंचना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।
तलाश अभियान जारी, पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद
केदारताल क्षेत्र में फंसे 8 पर्वतारोहियों की तलाश के लिए अभियान जारी है, लेकिन अब तक उनके बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों के साथ हवाई सर्वेक्षण दल भी संभावित स्थानों पर निगरानी कर रहा है। बचाव कार्य की सफलता काफी हद तक मौसम में सुधार, दृश्यता और दुर्गम क्षेत्र तक सुरक्षित पहुंच बनाने पर निर्भर करेगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पर्वतारोही किस स्थान पर फंसे हैं और उनके पास भोजन, पानी तथा ठंड से बचाव के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं या नहीं। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। सभी की निगाहें इस अभियान पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि बचाव दल जल्द ही पर्वतारोहियों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल सकेंगे।