खटीमा : उत्तराखंड के खटीमा में तीन दिवसीय उत्तराखंड आदि रंगोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और जुएल ओराम समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आदि रंगोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे जनजातीय कलाकारों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति लोककला और लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुतियां देकर समां बांध दिया। राजस्थान मध्य प्रदेश हरियाणा उत्तराखंड छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र और झारखंड समेत कई राज्यों के कलाकारों ने अपनी-अपनी जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया।
कलाकारों के साथ थिरके मुख्यमंत्री धामी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी जनजातीय संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने कलाकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर नृत्य किया और ढोल भी बजाया। मुख्यमंत्री के इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का उत्साह बढ़ा दिया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आदि रंगोत्सव महज एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है बल्कि यह जनजातीय समाज की संस्कृति परंपरा और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने जनजातीय समाज को शिक्षा रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जोड़कर सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जनजातीय क्षेत्रों और समुदायों के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
एकलव्य विद्यालय के लिए करीब 10 करोड़ की घोषणा
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने खटीमा के एकलव्य विद्यालय के विस्तार और सुविधाओं के विकास के लिए करीब 10 करोड़ रुपये की घोषणा की। बताया गया कि विद्यालय में लगभग 480 विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
इस घोषणा को जनजातीय क्षेत्र में शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विद्यालय में बेहतर शैक्षणिक और आवश्यक सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जाएगा जिससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा का वातावरण मिल सके।
किरेन रिजिजू ने की उत्तराखंड की जनजातीय संस्कृति की सराहना
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी उत्तराखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और कार्यक्रम में प्रस्तुत की गई लोककलाओं की सराहना की। उन्होंने जनजातीय समुदायों की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया।
आदि रंगोत्सव में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने खटीमा में विविध जनजातीय संस्कृतियों का संगम देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा लोकसंगीत और नृत्य ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
कई राज्यों के कलाकारों ने दी शानदार प्रस्तुतियां
तीन दिवसीय रंगोत्सव में राजस्थान मध्य प्रदेश हरियाणा उत्तराखंड छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र और झारखंड समेत कई राज्यों से जनजातीय कलाकार पहुंचे हैं। कलाकारों ने अपनी पारंपरिक लोककलाओं और नृत्य शैलियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता को मंच पर प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य जनजातीय समाज की कला संस्कृति और परंपराओं को व्यापक मंच प्रदान करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी है। विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पहले ही दिन आदि रंगोत्सव को यादगार बना दिया।
खटीमा में आयोजित यह रंगोत्सव आने वाले तीन दिनों तक जनजातीय संस्कृति लोककला और परंपराओं का उत्सव बनेगा। आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकार अपनी सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत करेंगे।