मसूरी पर्यटन नगरी मसूरी में कूड़ा निस्तारण की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लंबे समय से कूड़ा नहीं उठाए जाने और गंदगी से फैल रही दुर्गंध से परेशान स्थानीय सभासदों एवं निवासियों ने एमआरएफ सेंटर और बायोमैथेन प्लांट की ओर जाने वाले मार्ग पर धरना देकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने नगर पालिका की कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की। धरने के दौरान फोन पर हुई बातचीत में 15 दिनों के भीतर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था दुरुस्त करने का आश्वासन दिया गया।
कूड़े से दुर्गंध आसपास के लोगों का जीना हुआ मुश्किल
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि क्षेत्र में कई-कई दिनों तक कूड़ा नहीं उठाया जाता जिससे आसपास के घरों और सिविल अस्पताल क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है। कूड़ेदान के आसपास रहने वाले परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और लोगों ने बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर पालिका को कई बार इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। लोगों ने कूड़े के निस्तारण की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए संबंधित अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
पर्यावरण और जलस्रोतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता
धरना दे रहे लोगों ने कूड़ा प्रबंधन के दौरान पर्यावरणीय नियमों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी की गाइडलाइन के पालन को लेकर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कूड़े से निकलने वाला दूषित पानी प्राकृतिक जलस्रोतों के माध्यम से नदी तक पहुंच सकता है जिसका पानी आगे चलकर लोगों के उपयोग में आता है।
स्थानीय लोगों ने इस आशंका को गंभीर बताते हुए कूड़े के निस्तारण की प्रक्रिया की जांच कराने और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की। हालांकि दूषित पानी के नदी तक पहुंचने और नियमों के उल्लंघन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुरानी और नई कंपनी की व्यवस्था पर उठाए सवाल
स्थानीय निवासियों ने कूड़ा प्रबंधन का काम संभालने वाली पुरानी कंपनी और वर्तमान व्यवस्था की तुलना करते हुए सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले कूड़ा प्रबंधन का काम दूसरी कंपनी के पास था और उनके अनुसार उस दौरान इस तरह की शिकायतें सामने नहीं आती थीं। वहीं नाइट एंड डाउन शिवा कंपनी के आने के बाद से कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है।
स्थानीय लोगों ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए व्यवस्था में कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नगर पालिका और संबंधित कंपनी को लोगों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।
स्थानीय लोगों को रोजगार से हटाने का आरोप
स्थानीय निवासी नरेश माल ने आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा स्थानीय लोगों को रोजगार से हटाकर बाहरी लोगों को काम पर लाया जा रहा है। उनके अनुसार इससे स्थानीय लोगों के रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
उन्होंने कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था में कथित मिलीभगत और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। नरेश माल ने मांग की कि पूरे मामले में पारदर्शिता बरती जाए और स्थानीय लोगों की शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी बताया कि कूड़ा प्रबंधन से संबंधित मामले में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन उनके अनुसार अब तक मांगी गई जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उन्होंने संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की ताकि कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
आपदा और बारिश के तर्क पर भी जताई आपत्ति
स्थानीय लोगों ने कूड़ा निस्तारण की समस्या को लेकर नगर पालिका की ओर से बायोमैथेन प्लांट की व्यवस्था प्रभावित होने के पीछे आपदा और बारिश को कारण बताए जाने संबंधी कथित तर्क पर भी सवाल उठाए। नरेश माल का दावा है कि उनके वार्ड में ऐसी कोई आपदा नहीं आई थी जिससे इस समस्या को उचित ठहराया जा सके।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समस्या को लंबे समय से उठाया जा रहा है लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने मांग की कि कूड़ा निस्तारण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय हो।
स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की उठाई मांग
स्थानीय निवासी गौरव गुप्ता ने कहा कि कूड़ा निस्तारण की समस्या के समाधान की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन अब तक इसका स्थायी हल नहीं निकल पाया है। उन्होंने कहा कि अब लोग केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे और कूड़े का जल्द निस्तारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
गौरव गुप्ता ने नगर पालिका से जुड़े निर्णय स्थानीय स्तर पर लिए जाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर भेजती है इसलिए स्थानीय समस्याओं के समाधान से जुड़े निर्णयों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका सुनिश्चित होनी चाहिए।
फोन पर बातचीत में 15 दिन के भीतर समाधान का आश्वासन
धरने के दौरान सभासद बिना मल्ल और स्थानीय निवासी गौरव भसीन के बीच फोन पर बातचीत हुई। बातचीत के दौरान गौरव भसीन ने आश्वासन दिया कि 15 दिनों के भीतर कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था पूरी कर दी जाएगी।
हालांकि इस आश्वासन के बाद भी स्थानीय लोगों की नाराजगी बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले एक साल से इस समस्या को उठा रहे हैं लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में वे केवल आश्वासन के बजाय धरातल पर व्यवस्था में सुधार देखना चाहते हैं।
अब समाधान की समयसीमा पर टिकी निगाहें
मसूरी में कूड़ा निस्तारण को लेकर उठे विरोध के बाद अब सबकी निगाहें नगर पालिका और संबंधित कंपनी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि 15 दिनों के भीतर दिए गए आश्वासन के अनुरूप कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था में सुधार होगा और क्षेत्र में फैली गंदगी एवं दुर्गंध से राहत मिलेगी।
इसके साथ ही स्थानीय लोगों द्वारा उठाए गए रोजगार आरटीआई के तहत दस्तावेज उपलब्ध कराने पर्यावरणीय मानकों के पालन और कथित मिलीभगत से जुड़े सवालों पर संबंधित पक्षों का जवाब भी महत्वपूर्ण होगा। अब देखना होगा कि नगर पालिका और संबंधित कंपनी इस समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।