कोलकाता: कोलकाता के एक्रोपोलिस मॉल में एक बार फिर फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच की गई। मॉल में पहले आग लगने की घटनाओं को देखते हुए दमकल विभाग की ओर से सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया गया। इस दौरान मॉल के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद फायर सेफ्टी सिस्टम की बारीकी से जांच की गई।
2016 में फूड कोर्ट, 2024 में बुक स्टोर में लगी थी आग
एक्रोपोलिस मॉल में आग लगने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। साल 2016 में मॉल के फूड कोर्ट में आग लगी थी। इसके बाद जून 2024 में एक बुक स्टोर में आग लगने की घटना हुई। वहीं, इसके करीब छह महीने बाद नवंबर 2024 में मॉल में एक बार फिर आग लग गई थी।
सत्ता परिवर्तन के बाद दमकल विभाग की सक्रियता, मॉल में चला सुरक्षा ऑडिट
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद दमकल विभाग की ओर से फायर सेफ्टी को लेकर सक्रियता बढ़ाई गई है। इसी कड़ी में एक्रोपोलिस मॉल में भी सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच की गई। अधिकारियों ने आग से बचाव और आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने से जुड़े इंतजामों का निरीक्षण किया।
एग्जिट गेट से स्मोक डिटेक्टर तक हुई जांच
निरीक्षण के दौरान मॉल के एग्जिट गेट, स्मोक डिटेक्टर और हीट डिटेक्टर की जांच की गई। इसके अलावा हाइड्रेंट सिस्टम, होज रील और फायर शाफ्ट की स्थिति भी देखी गई। दमकल अधिकारियों ने यह भी परखा कि आपात स्थिति में ये व्यवस्थाएं प्रभावी तरीके से काम कर रही हैं या नहीं।
कालीघाट और पाटुली फायर स्टेशन के अधिकारियों ने किया संयुक्त निरीक्षण
एक्रोपोलिस मॉल की फायर सेफ्टी व्यवस्था का निरीक्षण कालीघाट फायर स्टेशन और पाटुली फायर स्टेशन के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से किया। अधिकारियों ने मॉल के विभिन्न हिस्सों का जायजा लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े जरूरी बिंदुओं को देखा।
20 मंजिला इमारत और रूफटॉप तक पहुंची दमकल टीम
एक्रोपोलिस मॉल की 20 मंजिला इमारत के सभी हिस्सों में फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच की गई। इसके साथ ही 21वीं मंजिल पर मौजूद रूफटॉप का भी निरीक्षण किया गया। मॉल के अलग-अलग स्तरों पर सुरक्षा इंतजामों को परखने के साथ अधिकारियों ने जरूरी सुधारों को लेकर छोटे-छोटे दिशा-निर्देश भी दिए।
आग की घटनाओं के बाद सुरक्षा इंतजामों पर जोर
लगातार सामने आई आग की घटनाओं के मद्देनजर मॉल जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। एक्रोपोलिस मॉल में हुई यह जांच इसी दिशा में उठाया गया कदम है, जिसमें आग से बचाव के उपकरणों और आपातकालीन निकासी व्यवस्था को प्रमुखता से परखा गया।