कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को उस समय अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई, जब गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग पर चर्चा के दौरान सत्ताधारी पक्ष के भीतर का अंदरूनी असंतोष सार्वजनिक हो गया। बेलेघाटा से टीएमसी (कालीघाट समर्थक गुट) के विधायक कुणाल घोष को सदन में हंगामा करने और मुख्य सचेतक को बोलने से रोकने के आरोप में मार्शल द्वारा घसीटकर बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद स्पीकर रथेंद्र बोस ने उन्हें दिनभर के लिए विधानसभा से सस्पेंड कर दिया।
"मेरा नाम क्यों काटा?" — माइक के सामने अड़ गए कुणाल
घटना उस वक्त हुई जब विरोधी दल के मुख्य सचेतक अखरुज्जामान (ऋतब्रत समर्थक गुट) गृह विभाग पर चर्चा में बोलने के लिए उठे। उसी समय कुणाल घोष अपनी सीट छोड़कर उनके माइक के बिल्कुल सामने आकर खड़े हो गए।कुणाल घोष ने तीखे तेवर में सवाल दागते हुए कहा:"आपने सूची से मेरा नाम क्यों काटा? मुझे बोलने का मौका क्यों नहीं दिया जा रहा है? कालीघाट समर्थक विधायकों की आवाज को सदन में दबाया जा रहा है" इस दौरान अखरुज्जामान के पास ही विरोधी दल के नेता ऋतब्रत बनर्जी, जावेद खान और फिरहाद हकीम जैसे वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

वेल में उतरे बीजेपी विधायक, स्पीकर ने दी चेतावनी
कुणाल घोष के इस अप्रत्याशित आचरण से सदन में अफरा-तफरी मच गई। बीजेपी के विधायकों ने भी वेल में आकर कुणाल घोष को रोका और उन्हें अपनी सीट पर जाने की हिदायत दी।स्पीकर रथेंद्र बोस ने बार-बार कुणाल घोष से अपनी सीट पर लौटने का अनुरोध किया और चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर उन्हें निष्कासित कर दिया जाएगा। जब कुणाल घोष नहीं माने, तो स्पीकर के आदेश पर मार्शल बुलाए गए। मार्शलों ने कुणाल घोष को पकड़कर जबरन सदन से बाहर कर दिया।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला
इस शर्मनाक वाकये पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कुणाल घोष के व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की।सीएम सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा: "विधानसभा के इतिहास में मैंने इस तरह की अशोभनीय और उदंड हरकत पहले कभी नहीं देखी। कुणाल घोष न केवल काम में बाधा डाल रहे थे, बल्कि वे एक वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अखरुज्जामान साहब के साथ शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार करने पर आमादा थे। इस तरह की गुंडागर्दी की लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है।"दक्षिण बंगाल में टीएमसी के भीतर जारी 'कालीघाट गुट' बनाम 'ऋतब्रत गुट' की अंदरूनी खींचतान अब सीधे विधानसभा के पटल पर आ पहुंची है, जिससे राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है।