कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के तीन महीने के भीतर रंगदारी (extortion) और जबरन वसूली के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए बंगाल बीजेपी नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाया है। दमदम और उत्तर 24 परगना के देगंगा में पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ रंगदारी के गंभीर आरोप सामने आने के बाद राज्य बीजेपी ने अब तक 250 से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं को कारण बताओ (show-cause) नोटिस जारी किया है और 22 आरोपी कार्यकर्ताओं को निलंबित करने का निर्णय लिया है।
दमदम और देगंगा में रंगदारी के आरोप
हाल ही में दमदम के पीके गुहा रोड निवासी प्रमोटर अमरनाथ सिंह ने स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं पर रंगदारी मांगने, कार्यालय में तोड़फोड़ करने और बंदूक के बट से हमला करने का आरोप लगाया था। इसी तरह देगंगा में भी एक बीजेपी बूथ अध्यक्ष पर एक लाख रुपये की रंगदारी मांगने की शिकायत दर्ज हुई थी। दमदम के बीजेपी विधायक अरिजीत बक्सी ने घटना की निंदा करते हुए पुलिस को आरोपियों के खिलाफ बिना दलगत भेदभाव के सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
अनुशासन समिति को त्वरित जांच के निर्देश और RSS की सलाह
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य, दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल और राज्य के परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने स्पष्ट किया है कि रंगदारी में लिप्त लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचार प्रमुख जिष्णु बसु ने भी संदेश दिया है कि बिना किसी व्यक्ति विशेष का पक्ष लिए आरोपों पर तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी की अनुशासन समिति को ऐसे सभी मामलों की जांच प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
विपक्ष का हमला
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रंगदारी के इन मुद्दों को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि नई सरकार के तीन महीनों में ही करोड़ों रुपये की लूट हुई है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने स्वीकार किया कि अगर इस 'वायरस' पर समय रहते नकेल नहीं कसी गई तो पार्टी की छवि को गंभीर नुकसान हो सकता है।