कोलकाता डेस्क: पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व से असम पहुंची बाघिन 'दूआर रानी' को आखिरकार वन विभाग की संयुक्त टीम ने पकड़ लिया है। मंगलवार (3 नवंबर) को असम के कोकराझार जिले के डोटमा इलाके में करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे ट्रैंक्विलाइजर डार्ट देकर बेहोश किया गया। अब उसे वापस पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व लाया जा रहा है। इस पूरे अभियान में पश्चिम बंगाल और असम के वन विभाग की टीमों ने मिलकर काम किया।
दो राज्यों की टीमों ने मिलकर चलाया अभियान
बाघिन को पकड़ने के लिए वन विभाग ने विशेष इंतजाम किए थे। अभियान में पश्चिम बंगाल से तीन प्रशिक्षित हाथियों को भेजा गया था। इसके अलावा छह से सात अर्थमूवर, ट्रैंक्विलाइजर गन और बड़ी संख्या में वनकर्मी तैनात किए गए थे। इलाके की घेराबंदी के लिए जाल लगाए गए थे, ताकि बाघिन को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित किया जा सके। आखिरकार मंगलवार शाम करीब 5:15 बजे उसे ट्रैंक्विलाइजर डार्ट से बेहोश करने में सफलता मिली।
इंसानी बस्तियों के करीब पहुंचने से बढ़ी थी चिंता
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बाघिन असम के रायमोना नेशनल पार्क से जुड़े इलाकों में घूमते हुए धीरे-धीरे मानव बस्तियों के करीब पहुंचने लगी थी। इसी वजह से उसकी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जा रही थी। हालांकि, इंसानों पर हमले की कोई खबर सामने नहीं आई थी, लेकिन आसपास के गांवों में उसकी मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग ने उसे सुरक्षित वापस लाने का फैसला किया।
रेडियो कॉलर से रखी जा रही थी नजर
बाघिन की पहचान T-138 के रूप में की गई है। उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रेडियो कॉलर लगाया गया था। 28 अक्टूबर की रात कुछ समय के लिए इसका सिग्नल मिलना बंद हो गया था, जिससे वन अधिकारियों की चिंता बढ़ गई थी। हालांकि, 30 अक्टूबर की सुबह दोबारा सिग्नल मिलने के बाद उसकी लोकेशन का पता चल सका। इसके बाद पश्चिम बंगाल और असम की संयुक्त टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी।
बिहार से बंगाल लाई गई थी 'दूआर रानी'
करीब तीन साल की इस बाघिन को बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में लाया गया था। 2 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में उसे जंगल में छोड़ा गया था। बक्सा में बाघों की आबादी को फिर से मजबूत करने की योजना के तहत यह पश्चिम बंगाल का पहला बाघ पुनर्वास अभियान था।
अब बक्सा में विशेष निगरानी में रहेगी बाघिन
पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज ओरांव ने अभियान की सफलता की जानकारी देते हुए असम सरकार और वहां के वन विभाग के सहयोग की सराहना की। अधिकारियों के मुताबिक, बाघिन को वापस बक्सा टाइगर रिजर्व ले जाकर 2.2 हेक्टेयर के विशेष एक्लीमेटाइजेशन बाड़े में रखा जाएगा, जहां उसकी सेहत और व्यवहार पर निगरानी की जाएगी।
बक्सा के जंगलों में बाघों की आबादी को दोबारा स्थापित करने की कोशिशों के बीच 'दूआर रानी' की सुरक्षित वापसी को अहम माना जा रहा है। अब वन विभाग की नजर इस बात पर होगी कि वह नए वातावरण में किस तरह खुद को ढालती है।