कोलकाता: दुर्गापूजा के उत्सवी माहौल के बीच कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में हुए दर्दनाक भगदड़ हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। सप्तमी की शाम अत्यधिक भीड़ और लोगों के दबाव के कारण हुई इस घटना में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मृतकों के परिजनों में मातम पसरा है और आम लोगों के बीच भी चिंता का माहौल है। इस बीच, पंडाल में सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, स्वयंसेवकों की भूमिका और लोगों के सुरक्षित निकास को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
इसी बीच चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति के पूर्व अध्यक्ष जयंत बनर्जी ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। वर्तमान में वह पूजा समिति से जुड़े नहीं हैं, लेकिन हादसे की खबर मिलने के बाद उन्होंने गहरा दुख व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने इस वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थिति में बदलाव को लेकर कुछ दावे किए हैं। जयंत बनर्जी के अनुसार, इस बार पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा को पिछले वर्षों की तुलना में दूसरी दिशा में स्थापित किया गया था। उनका दावा है कि इस बदलाव की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने वर्तमान पूजा समिति के सदस्यों को सतर्क भी किया था, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि, प्रतिमा की स्थिति बदलने और भगदड़ की घटना के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का अब तक कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। हादसे की वास्तविक वजह जानने के लिए भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम, पंडाल की बनावट, प्रवेश और निकास मार्गों तथा आयोजकों की तैयारियों की जांच जरूरी है।
चोरबागान हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में इस वर्ष पूजा की शुरुआत से ही दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ रही थी। आकर्षक थीम और पंडाल की सजावट देखने के लिए शहर के विभिन्न इलाकों से लोग पहुंच रहे थे। आरोप है कि मां दुर्गा के दर्शन के लिए लोगों को लंबे समय तक कतार में खड़ा रहना पड़ रहा था। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, वैसे-वैसे व्यवस्था संभालने की चुनौती भी बढ़ती गई।
आखिरकार सप्तमी की शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। अत्यधिक भीड़ और लोगों के दबाव के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हुई, जिसमें 19 लोगों की जान चली गई। कई अन्य लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पूजा आयोजकों की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह जांच का विषय है कि भारी भीड़ की आशंका के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे या नहीं और आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
राजनीतिक बदलाव के बाद चोरबागान पूजा समिति में भी हुआ परिवर्तन?
इस हादसे के बाद चोरबागान की पूजा समिति में हुए बदलाव का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। जयंत बनर्जी के अनुसार, राज्य में राजनीतिक बदलाव के बाद चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा के संचालन में भी परिवर्तन हुआ और उन्हें पूजा की जिम्मेदारी छोड़ने के लिए कहा गया था। जयंत का दावा है कि वह वर्ष 2011 के आसपास से इस पूजा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शुरुआती वर्षों में यहां थीम आधारित पूजा का चलन अधिक नहीं था, लेकिन 2017 के बाद समिति ने थीम पूजा की दिशा में कदम बढ़ाए। धीरे-धीरे चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा कोलकाता की चर्चित दुर्गापूजाओं में शामिल हो गई। आकर्षक सजावट, प्रतिमा और नए प्रयोगों के कारण हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में दर्शनार्थी पहुंचने लगे। लंबे समय तक पूजा से जुड़े रहने के बाद जिम्मेदारी से हटने का मुद्दा जयंत के लिए भावनात्मक भी है। हालांकि, पूजा समिति में हुए बदलाव और इस वर्ष के हादसे के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का प्रमाण सामने नहीं आया है। इस मामले में वर्तमान पूजा समिति का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
पुरी में थे जयंत बनर्जी, परिचितों से मिली हादसे की खबर
हादसे के समय जयंत बनर्जी कोलकाता में मौजूद नहीं थे। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि वह परिवार के साथ पुरी में हैं। चोरबागान के कुछ परिचित दोस्तों के माध्यम से उन्हें इस दर्दनाक घटना की जानकारी मिली। खबर सुनने के बाद वह बेहद दुखी और शोकाकुल हो गए। जयंत ने कहा कि भले ही अब वह पूजा समिति से जुड़े नहीं हैं, लेकिन चोरबागान की पूजा से उनका भावनात्मक लगाव आज भी बना हुआ है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति उन्होंने श्रद्धांजलि व्यक्त की और दिवंगत आत्माओं की शांति की कामना की। साथ ही, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की। हालांकि, शोक व्यक्त करने के साथ ही उन्होंने पूजा से जुड़े कुछ पुराने अनुभवों का भी उल्लेख किया। उनके बयान में मां दुर्गा की प्रतिमा की स्थिति में बदलाव, खूंटी पूजा के स्थान में परिवर्तन और पिछले कुछ वर्षों में उनके निजी जीवन में हुई दुखद घटनाओं का जिक्र सामने आया।
मां दुर्गा की प्रतिमा की दिशा बदलने पर पूर्व अध्यक्ष का दावा
जयंत बनर्जी के अनुसार, इस वर्ष चोरबागान के पूजा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा को पिछले वर्षों की तुलना में दूसरी दिशा में स्थापित किया गया था। उनका कहना है कि इस बदलाव के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने वर्तमान समिति के सदस्यों को सतर्क करने की कोशिश की थी। लेकिन उनके मुताबिक, उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी संदर्भ में जयंत ने पिछले कुछ वर्षों के अपने निजी अनुभवों का उल्लेख किया। उनका कहना है कि पूजा पंडाल या खूंटी पूजा के स्थान में बदलाव के बाद उनके जीवन में कुछ दुखद घटनाएं हुई थीं। उन्होंने इन घटनाओं को अपने व्यक्तिगत अनुभव और विश्वास के संदर्भ में सामने रखा। हालांकि, मां दुर्गा की प्रतिमा की दिशा या स्थान बदलने से भगदड़ जैसी दुर्घटना होने का कोई प्रमाणित आधार सामने नहीं आया है। किसी भी हादसे की वास्तविक वजह जानने के लिए भीड़ का दबाव, लोगों की आवाजाही, प्रवेश और निकास के रास्ते तथा सुरक्षा इंतजाम जैसे व्यावहारिक पहलुओं की जांच आवश्यक है। जयंत बनर्जी का बयान उनके व्यक्तिगत दावों और मान्यताओं के दायरे में है।
वर्ष 2020 से 2024 तक की घटनाओं का भी किया जिक्र
अपने वीडियो संदेश में जयंत बनर्जी ने वर्ष 2020 की कोरोना महामारी के दौरान हुई एक घटना का जिक्र किया। उनके दावे के मुताबिक, उस वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा की जगह बदली गई थी। उसी दौरान उनके एक पालतू कुत्ते की मौत हो गई थी। जयंत ने इस अनुभव को अपनी निजी जिंदगी की एक दुखद घटना के रूप में याद किया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2023 में हुई खूंटी पूजा का उल्लेख किया। उनके अनुसार, उस वर्ष खूंटी पूजा किसी दूसरी जगह पर की गई थी और इसके बाद उनके पिता का निधन हो गया। जयंत ने यह भी दावा किया कि वर्ष 2024 में असामान्य समय पर खूंटी पूजा किए जाने के बाद उनकी मां का निधन हो गया था। जयंत ने इन घटनाओं को संयोग के रूप में पेश करते हुए कहा कि पूजा से जुड़े बदलावों के बाद उनके जीवन में कई दुखद घटनाएं हुईं। इसी वजह से इस वर्ष प्रतिमा की स्थिति में बदलाव को लेकर भी उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त की। हालांकि, इन व्यक्तिगत घटनाओं और पूजा के स्थान या समय में बदलाव के बीच किसी कारणात्मक संबंध का प्रमाण नहीं है। इसी तरह, चोरबागान में हुई भगदड़ और प्रतिमा की स्थिति में बदलाव के बीच भी अब तक कोई प्रमाणित संबंध सामने नहीं आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाले थीम को लेकर भी जताई नाराजगी
चोरबागान पूजा समिति में हुए बदलाव को लेकर जयंत बनर्जी ने एक और मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार, समिति में परिवर्तन से पहले उन्होंने खूंटी पूजा की थी और उस समय पूजा की थीम की घोषणा भी कर दी गई थी। जयंत का दावा है कि प्रस्तावित थीम के तहत एक दीवार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मां दुर्गा की आरती करते हुए दर्शाने वाली तस्वीर बनाई गई थी। लेकिन बाद में पूजा समिति में बदलाव के बाद उस दीवार को तोड़ दिया गया और दोबारा खूंटी पूजा की गई। इस घटना को लेकर भी पूर्व अध्यक्ष ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि पूजा की जिम्मेदारी से हटने के बावजूद चोरबागान की पूजा से उनका भावनात्मक जुड़ाव बना रहा। ऐसे में पूजा की तैयारियों में बदलाव और उसके बाद हुई दर्दनाक घटना ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया है। हालांकि, दीवार तोड़े जाने, थीम बदलने या खूंटी पूजा का स्थान बदलने और इस वर्ष हुए हादसे के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध का प्रमाण सामने नहीं आया है। इस मामले में वर्तमान पूजा समिति का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
वर्तमान पूजा समिति की भूमिका पर सवाल, जांच से स्पष्ट होगी हादसे की वजह
चोरबागान हादसे के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर है। पंडाल में भारी संख्या में दर्शनार्थियों के पहुंचने की संभावना के मद्देनजर पर्याप्त स्वयंसेवक तैनात थे या नहीं, लोगों के आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्ते थे या नहीं और आपात स्थिति से निपटने की योजना कितनी प्रभावी थी—इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है। जयंत बनर्जी ने अपने बयान में पूजा समिति में बदलाव और प्रतिमा की स्थिति बदलने का मुद्दा उठाया है। लेकिन हादसे की वास्तविक वजह निर्धारित करने के लिए उनके बयान के अलावा घटनास्थल की परिस्थितियों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य संबंधित तथ्यों की जांच आवश्यक है। इस दर्दनाक घटना में जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह अपूरणीय क्षति है। वहीं, घायलों का समुचित इलाज और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है।
क्या दोबारा चोरबागान पूजा की जिम्मेदारी संभालेंगे जयंत बनर्जी?
चोरबागान की पूजा से लंबे समय तक जुड़े रहने के बावजूद जयंत बनर्जी ने संकेत दिया है कि अब वह भविष्य में इस पूजा की जिम्मेदारी नहीं संभालना चाहते। उनके मुताबिक, इस पूजा से उनकी कई वर्षों की यादें और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। पूजा को लोकप्रिय बनाने और थीम आधारित आयोजनों की दिशा में आगे बढ़ाने में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई थी। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों और इस वर्ष हुए दर्दनाक हादसे के बाद वह बेहद आहत हैं। जयंत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में चोरबागान की पूजा से जुड़ने या इसकी जिम्मेदारी संभालने की उनकी कोई योजना नहीं है।
कुल मिलाकर, चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा में हुआ हादसा बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। पूर्व अध्यक्ष जयंत बनर्जी के बयान में पूजा समिति में बदलाव, प्रतिमा की स्थिति बदलने और उनके निजी जीवन में हुई कुछ दुखद घटनाओं का जिक्र है। हालांकि, इन घटनाओं को हादसे की वजह मानने का कोई प्रमाण नहीं है। फिलहाल सबसे जरूरी है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए, यदि कहीं लापरवाही हुई है तो उसकी पहचान की जाए और भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। त्योहार की खुशियों के बीच किसी भी परिवार को दोबारा इस तरह अपने प्रियजनों को खोने का दर्द न सहना पड़े—चोरबागान की यह घटना इसी जरूरत की याद दिलाती है।