फरक्का: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुर्शिदाबाद जिले की फरक्का विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख ने उस वक्त सबको हैरान कर दिया, जब वोटर लिस्ट से नाम कटने के बावजूद उन्होंने चुनाव जीत लिया।
यह जीत इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि चुनाव से पहले उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कानूनी रास्ता अपनाकर खुद को फिर से चुनावी मैदान में उतारा।
कानूनी लड़ाई के बाद मिली राहत
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मोताब शेख का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपीलीय ट्रिब्यूनल में इस फैसले को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित ट्रिब्यूनल ने नामांकन की अंतिम तारीख से ठीक पहले उनके अधिकार बहाल कर दिए। इस फैसले ने पूरी चुनावी तस्वीर बदल दी।
BJP को हराकर दर्ज की बड़ी जीत
फरक्का सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय रहा, लेकिन अंत में बाजी कांग्रेस के मोताब शेख के हाथ लगी।
- मोताब शेख (कांग्रेस) – 63,050 वोट
- सुनील चौधरी (BJP) – 54,857 वोट
- अमीरुल इस्लाम (TMC) – 47,256 वोट
शेख ने BJP उम्मीदवार को 8,193 वोटों से हराकर शानदार जीत दर्ज की।
कोर्ट के फैसले ने बदली किस्मत
चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश में आधार कार्ड को सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने की बात कही गई थी। इसी आधार पर मोताब शेख का नाम फिर से मतदाता सूची में जोड़ा गया और उन्हें चुनाव लड़ने का मौका मिला।
कांग्रेस को मिला मनोबल
फरक्का के अलावा कांग्रेस ने रानीनगर सीट पर भी जीत हासिल की। जुल्फिकार अली ने TMC उम्मीदवार को हराकर पार्टी को एक और सफलता दिलाई।इसे राज्य में कांग्रेस की वापसी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।