पश्चिम बंगाल में चुनावी तैयारियों के बीच एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां बस ड्राइवरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
25 मार्च को बेहाला के तरातला ब्रिज के नीचे से कोलकाता पुलिस ने चुनावी ड्यूटी के लिए कई बसों को अपने कब्जे में लिया। ड्राइवरों को बताया गया कि उन्हें केवल 3 घंटे का काम करना होगा और इसके बदले 80 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से 240 रुपये दिए जाएंगे।
लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग निकली। ड्राइवरों का आरोप है कि उन्हें बीते कल शाम से कोलकाता के महाकरण मेट्रो स्टेशन के बाहर खड़ा रखा गया है।
ड्राइवरों ने बताया कि ना तो उनके खाने-पीने की कोई व्यवस्था की गई है और ना ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। तेज गर्मी में भी उन्हें वहीं इंतजार करना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि यह उनके साथ अन्याय है और प्रशासन को तुरंत उनकी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या चुनावी तैयारियों के नाम पर इस तरह से मजदूरों और ड्राइवरों को परेशान करना सही है? और क्या प्रशासन इस मामले में कोई कार्रवाई करेगा?