कोलकाता: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। चुनाव आयोग द्वारा नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने पार्टी की सुप्रीमो ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का खुला प्रस्ताव दिया है। बागी गुट ने घोषणा की है कि यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से उम्मीदवारी पेश करती हैं, तो वे उनके खिलाफ अपना कोई भी प्रत्याशी नहीं उतारेंगे। गौरतलब है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा नंदीग्राम सीट खाली करने के कारण यहां उपचुनाव हो रहा है।
बागी गुट का दावा: 'ममता लड़ें तो हम नहीं उतारेंगे प्रत्याशी'
विधानसभा में विरोधी दल के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी शिवर के वरिष्ठ विधायक मदन मित्र और प्रवक्ता ऋजु दत्त ने बुधवार को इस रणनीति की घोषणा की। मदन मित्र ने कहा कि यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं तो बागी टीएमसी प्रत्याशी नहीं उतारेगी, जिससे यह साबित होगा कि वे भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा नहीं चाहते। वहीं ऋजु दत्त ने तंज कसते हुए कहा कि ममता बनर्जी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों जगह चुनाव हार चुकी हैं; ऐसे में एक बार जीतकर उन्हें अच्छा लगेगा, इसलिए बागी गुट उन्हें पूरा समर्थन देगा।
कालीघाट शिविर का पलटवार और पूर्व सहयोगियों की सलाह
बागी नेताओं के इस प्रस्ताव पर कालीघाट स्थित टीएमसी नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता और बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि कौन किस मंशा से क्या कह रहा है, उसे तवज्जो देने का कोई मतलब नहीं है। ममता बनर्जी ही टीएमसी की सर्वोच्च नेता हैं और प्रत्याशी का चयन वही करेंगी। दूसरी ओर, नंदीग्राम आंदोलन में ममता के पुराने सहयोगी रहे अबू ताहिर ने भी कहा कि पार्टी के इस कठिन दौर में ममता बनर्जी को खुद नंदीग्राम से मैदान में उतरना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि 2021 और 2026 में बिना स्थानीय नेताओं से चर्चा किए फैसले लेने का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा है।
भाजपा का तंज और आयोग के फैसले का इंतजार
तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच जारी इस खींचतान पर प्रदेश भाजपा ने तंज कसा है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता देवजीत सरकार ने कहा कि टीएमसी के दोनों ही धड़े एक जैसे हैं और उनके बीच कौन चुनाव लड़ता है या कौन नहीं, इससे भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ता। इस बीच, चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव की तारीख (6 अक्टूबर) की घोषणा के बावजूद 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और 'जोड़ा फूल' (घास पर फूल) चुनाव चिन्ह पर किस गुट का अधिकार होगा, इसका फैसला होना अभी बाकी है।