कोलकाता: न्यूटाउन की सनातनी दुर्गोत्सव समिति इस बार नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति और वैज्ञानिक विरासत से जोड़ने की तैयारी में है। समिति की ओर से इस वर्ष दुर्गापूजा का आयोजन पहले की तुलना में बड़े स्तर पर किया जाएगा। यह पूजा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के सलाहकार सुब्रत गुप्ता से जुड़ी पूजा के तौर पर भी चर्चा में रहती है।
2022 में हुई थी पूजा की शुरुआत
सनातनी दुर्गोत्सव समिति की ओर से पहली बार 2022 में दुर्गापूजा का आयोजन किया गया था। हालांकि, 2024 और 2025 में यहां पूजा नहीं हो सकी। आयोजकों का आरोप है कि तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से पूजा के लिए जरूरी अनुमति और व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराई गई थीं। अब राज्य में सरकार बदलने के बाद एक बार फिर यहां दुर्गोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजन की घोषणा
पूजा समिति ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस साल के आयोजन की जानकारी साझा की। इस दौरान समिति के चेयरमैन और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के प्रधान सलाहकार सुब्रत गुप्ता मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि इस बार पूजा का आयोजन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है और इसके जरिए भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर प्रस्तुत किया जाएगा।
'सनातन से विज्ञान' होगी पूजा की थीम
इस बार पूजा की थीम 'सनातन से विज्ञान' रखी गई है। इसके तहत प्राचीन भारत में विज्ञान, गणित, आयुर्वेद और अंतरिक्ष से जुड़ी ज्ञान परंपराओं को आधुनिक संदर्भ के साथ प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
शून्य और दशमलव की अवधारणा का भी होगा उल्लेख
सुब्रत गुप्ता ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में कई वैज्ञानिक अवधारणाओं का विकास हुआ था। उन्होंने शून्य की अवधारणा और दशमलव पद्धति का उदाहरण देते हुए कहा कि बाद के दौर में पश्चिमी वैज्ञानिकों ने भी विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोजन का उद्देश्य किसी तरह का विवाद या टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक विरासत को सामने रखना है।
यज्ञवेदी से आयुर्वेद तक दिखाई जाएगी परंपरा
आयोजकों के मुताबिक, प्राचीन भारत में यज्ञवेदी के निर्माण के लिए जरूरी माप और गणना की व्यवस्थित जानकारी मौजूद थी। इसी तरह आयुर्वेद के विकास और विस्तार की परंपरा को भी प्रदर्शित किया जाएगा। पूजा पंडाल के जरिए इतिहास और विज्ञान से जुड़े इन पहलुओं को दर्शाने की तैयारी है।
इसरो के सहयोग से होगी अंतरिक्ष विज्ञान की प्रदर्शनी
इस आयोजन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी ISRO के सहयोग से विशेष प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना है। अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़ी प्रदर्शनी 27 सितंबर को आयोजित की जाएगी। मंडप को बिरला मंदिर की शैली से प्रेरित रूप में तैयार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पूरे दिन खुला रहेगा पूजा परिसर, मेले का भी आयोजन
आयोजकों के अनुसार पूजा परिसर लोगों के लिए पूरे दिन खुला रहेगा। इसके साथ ही मेले का आयोजन भी किया जाएगा। समिति का कहना है कि मेले से होने वाली आय पूजा के आयोजन की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए धार्मिक आयोजन के साथ मेले को भी प्रमुखता दी जा रही है।
करीब 600 VVIP मेहमानों को भेजा गया निमंत्रण
सूत्रों के मुताबिक, पूजा समिति की ओर से करीब 600 VVIP मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया है। इनमें प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और 21 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किए जाने की जानकारी है। इसके अलावा राज्य बीजेपी के कई विधायक और मंत्री भी आमंत्रितों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं।
VVIP मूवमेंट के चलते सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम
बड़ी संख्या में VVIP मेहमानों के संभावित आगमन को देखते हुए पूजा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की निगरानी भी हो सकती है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अंतिम आधिकारिक जानकारी संबंधित प्रशासन की ओर से सामने आना बाकी है।