लंदन: विदेश की धरती पर भारतीय संस्कृति और बंगाली परंपराओं की पहचान को सहेजने का प्रयास लगातार जारी है। ब्रिटेन के हैरो में आयोजित होने वाला ‘पंचमुखी दुर्गोत्सव’ पिछले 21 वर्षों से प्रवासी बंगालियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम कर रहा है। इस वर्ष आयोजन की 21वीं वर्षगांठ के अवसर पर तीसरा ‘बंग संस्कृति सम्मेलन 2026’ भी आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन 16 और 17 अक्टूबर को होगा, जबकि दुर्गोत्सव 17 से 21 अक्टूबर तक चलेगा। हैरो आर्ट्स सेंटर में आयोजित होने वाले इस उत्सव में पूजा-अर्चना, भोग वितरण, धुनुची नृत्य, संगीत, साहित्य, नाटक और कला से जुड़े कार्यक्रम होंगे। आयोजन का उद्देश्य बंगाली सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।
21 वर्षों से बंगाली संस्कृति को सहेज रहा पंचमुखी दुर्गोत्सव
प्रवासी बंगालियों के लिए दुर्गापूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि, भाषा, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ने का अवसर भी है। लंदन के हैरो में पंचमुखी दुर्गोत्सव इसी भावना को पिछले 21 वर्षों से आगे बढ़ा रहा है।शरद ऋतु, काशफूल, शिउली की सुगंध और महालया की पारंपरिक वाणी बंगाली संस्कृति में विशेष स्थान रखते हैं। विदेश में रहने वाले बंगाली परिवारों के लिए दुर्गापूजा इन स्मृतियों को फिर से जीवंत करने का अवसर बनती है।पंचमुखी के पूजा मंडप में पारंपरिक परिधान, ढाक की थाप, धूप की खुशबू और मां दुर्गा की आराधना के साथ बंगाल की सांस्कृतिक छटा देखने को मिलती है। इस आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भी अपनी पारिवारिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलता है।
16 से 21 अक्टूबर तक होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम
इस वर्ष पंचमुखी की ओर से तीसरे बंग संस्कृति सम्मेलन और दुर्गोत्सव का आयोजन हैरो आर्ट्स सेंटर में किया जाएगा।
16 और 17 अक्टूबर: तीसरा बंग संस्कृति सम्मेलन 2026
17 से 21 अक्टूबर: पंचमुखी दुर्गोत्सव और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम
प्रमुख आकर्षण: मां दुर्गा की पूजा, भोग वितरण, धुनुची नृत्य, संगीत, साहित्य, नाटक और बंगाली खानपान
पांच दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में धार्मिक परंपराओं के साथ कला और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रमुखता दी जाएगी। आयोजकों का उद्देश्य उत्सव को सभी आयु वर्गों के लोगों के लिए एक साझा सांस्कृतिक मंच बनाना है।
बंग संस्कृति सम्मेलन में साहित्य, संगीत और कला पर होगी चर्चा
तीसरा बंग संस्कृति सम्मेलन पंचमुखी दुर्गोत्सव को व्यापक बौद्धिक और कलात्मक आयाम प्रदान करेगा। इसमें साहित्यकारों, कलाकारों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और संस्कृति प्रेमियों के एकत्र होने की योजना है।सम्मेलन में बंगाली भाषा, साहित्य, संगीत, नाटक और चित्रकला जैसे विषयों पर विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा। खास तौर पर ब्रिटेन में पली-बढ़ी नई पीढ़ी के लिए यह अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान को समझने का महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।ऐसे आयोजन प्रवासी समुदायों को अपनी विरासत से जोड़े रखने के साथ अलग-अलग सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं को समझने का अवसर भी देते हैं।
सभी समुदायों के लिए खुला है पंचमुखी का मंच
पंचमुखी दुर्गोत्सव की विशेषता यह है कि इसका आयोजन केवल बंगाली समुदाय तक सीमित नहीं है। ब्रिटिश, यूरोपीय और अन्य सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों से आने वाले लोग भी इसमें शामिल होते हैं।पूजा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सामूहिक आयोजनों के जरिए विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, मित्रता और आपसी सम्मान को बढ़ावा दिया जाता है। इस तरह दुर्गोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक मेल-मिलाप का अवसर भी बनता है।
सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहा संगठन
पंचमुखी की गतिविधियां दुर्गापूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रही हैं। संगठन ने संगीत और नाट्य आयोजनों के साथ सामाजिक पहलों तथा जनकल्याणकारी गतिविधियों में भी भागीदारी की है।आयोजकों के अनुसार, कोविड महामारी के दौरान और रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित लोगों की सहायता जैसे प्रयासों में भी समुदाय ने योगदान दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से संगठन ने सांस्कृतिक पहचान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को भी महत्व दिया है।
सौरभ बोले- सभी समुदायों को जोड़ना है उद्देश्य
पंचमुखी के प्रमुख आयोजकों में शामिल सौरभ ने कहा कि संगठन का उद्देश्य हमेशा लोगों को एक साथ लाना रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने के साथ पंचमुखी का मंच सभी समुदायों के लिए खुला है।उनके मुताबिक, दुर्गोत्सव और बंग संस्कृति सम्मेलन मित्रता, एकता और आपसी समझ को बढ़ावा देने वाले आयोजन हैं। कार्यक्रम की सफलता के पीछे स्वयंसेवकों की मेहनत और समर्पण की महत्वपूर्ण भूमिका है।
संस्कृति के जरिए जुड़ रही हैं नई पीढ़ियां
पंचमुखी दुर्गोत्सव के 21 वर्ष पूरे होना प्रवासी बंगाली समुदाय के सांस्कृतिक जीवन में निरंतरता का प्रतीक है। आयोजन के जरिए परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने और अलग-अलग समुदायों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।16 से 21 अक्टूबर तक हैरो आर्ट्स सेंटर में होने वाला यह आयोजन पूजा, कला, साहित्य और सामाजिक सहभागिता को एक मंच पर लाएगा। हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद अपनी भाषा, परंपरा और मातृभूमि से जुड़े रहने की भावना ही इस उत्सव की प्रमुख पहचान है।