कोलकाता: शहर में दुर्गापूजा की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं। जगह-जगह पंडाल तैयार हो रहे हैं और बाजारों में खरीदारी को लेकर भी रौनक बढ़ गई है। इसी बीच उत्तर कोलकाता की ऐतिहासिक शोभाबाजार राजबाड़ी में दुर्गापूजा की परंपरा, विधि-विधान, आचार और मंत्रों को लेकर खास प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
40 साल से चल रही है दुर्गापूजा की खास ट्रेनिंग
यह प्रशिक्षण उन लोगों के लिए आयोजित किया गया है, जो दुर्गापूजा करते हैं या फिर शास्त्र और संस्कृत भाषा में रुचि रखते हैं। करीब 40 वर्षों से सर्वभारतीय प्राच्यविद्या अकादमी की ओर से इस तरह का प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। पूजा से पहले प्रतिभागियों को मंत्रोच्चार के साथ-साथ पूजा की विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी जा रही है।
सिर्फ ब्राह्मणों तक सीमित नहीं प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण की खास बात यह है कि इसमें केवल ब्राह्मण या पुरोहित ही शामिल नहीं हैं। महिलाओं, बुजुर्गों, गैर-ब्राह्मणों के साथ-साथ बड़ी संख्या में युवा भी प्रशिक्षण ले रहे हैं। संस्कृत सीखने के अलावा प्रतिभागी दुर्गापूजा से जुड़े शास्त्रीय नियम और परंपराओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं।
बोधन से लेकर कुमारी पूजा तक सिखाई जा रही विधि
करीब दो सप्ताह से चल रहे इस प्रशिक्षण में पौराणिक पुस्तकों से मंत्र पढ़ने का अभ्यास कराया जा रहा है। इसके साथ ही दुर्गापूजा के अलग-अलग अनुष्ठानों का प्रैक्टिकल प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रतिभागियों को बोधन, देवी को अर्पण, हवन और कुमारी पूजा जैसी परंपराओं की प्रक्रिया समझाई जा रही है।
दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक प्रशिक्षण
शोभाबाजार राजबाड़ी के एक हिस्से में रोजाना दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक प्रशिक्षण चल रहा है। यहां पूजा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री भी रखी गई है। देवी की प्रतिमा के बजाय दुर्गा की तस्वीर को प्रतीक के रूप में रखकर पूजा और प्रशिक्षण कराया जा रहा है। कुमारी पूजा की प्रक्रिया समझाने के लिए वास्तविक कुमारी को भी प्रशिक्षण में शामिल किया गया है।
Gen Z में भी दिख रहा खास उत्साह
इस प्रशिक्षण में युवाओं, खासकर Gen Z की भागीदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। युवा प्रतिभागियों का कहना है कि वे दुर्गापूजा की विधि-विधान और परंपराओं को समझने के लिए यहां पहुंचे हैं। कई युवाओं का कहना है कि भले ही वे खुद पूजा न कराएं, लेकिन शास्त्र और पूजा पद्धति का ज्ञान भविष्य में उनके लिए उपयोगी रहेगा।
गलत तरीके से पूजा न हो, यही उद्देश्य: आयोजक
प्रशिक्षण के आयोजक जयंत कुसारी के मुताबिक, इसका उद्देश्य लोगों को पूजा की सही और शास्त्रसम्मत विधि से परिचित कराना है। उनका कहना है कि लोग गलत तरीके से पूजा करने के बजाय श्रद्धा और उचित विधि-विधान के साथ पूजा कर सकें, इसी उद्देश्य से यह प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है।
बलि और मांसाहारी भोग को लेकर भी दी जा रही जानकारी
दुर्गापूजा में मांसाहारी और शाकाहारी भोग को लेकर होने वाली बहस पर भी आयोजक ने अपनी बात रखी। उनका कहना है कि देवी दुर्गा शक्ति का स्वरूप हैं और शक्ति की उपासना में कुछ परंपराओं के तहत बलि तथा मछली-मांस के भोग का भी विधान बताया गया है। प्रशिक्षण के दौरान संबंधित परंपराओं और भोग की विधि के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
राजबाड़ी में परंपरा और नई पीढ़ी का संगम
शोभाबाजार राजबाड़ी के ऐतिहासिक माहौल में चल रहा यह प्रशिक्षण एक तरफ दुर्गापूजा की तैयारियों और परंपराओं से जुड़ा है, तो दूसरी तरफ नई पीढ़ी को शास्त्र और पूजा पद्धति से जोड़ने की कोशिश भी नजर आ रही है। महिलाओं, गैर-ब्राह्मणों और Gen Z की भागीदारी इस आयोजन को खास बना रही है।