कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और दिल्ली में विपक्षी नेताओं के विरोध-प्रदर्शन को लेकर बंगाल की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। इसी बीच, ममता बनर्जी की प्रस्तावित रैली को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। हालांकि, रैली को रोकने की किसी आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर विरोध-प्रदर्शन
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। इस विवाद की प्रमुख वजह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए और इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई। हालांकि, चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर राजनीतिक विवाद जारी है।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की आलोचना करती रही हैं। उन्होंने पहले कहा था कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन जारी रहेंगे। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच एकजुटता बनाने की कोशिश भी की जा रही है।
ममता बनर्जी की रैली पर सुवेंदु अधिकारी का कड़ा रुख
ममता बनर्जी की प्रस्तावित रैली और दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्ष के आंदोलन को लेकर सवाल उठाए और इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान बताया। अधिकारी ने कहा कि सरकार को हटाने का रास्ता चुनाव है और राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए अपनी लड़ाई लड़नी चाहिए।
12 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध मार्च के संदर्भ में भी टिप्पणी की। यह मार्च कोलकाता में राजाबाजार से पार्क सर्कस तक निकाले जाने की योजना के तहत चर्चा में था। तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र के कथित दमन, दिल्ली में ममता बनर्जी को हिरासत में लिए जाने और विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के विरोध से भी जोड़ा था।
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के बाद बंगाल में बढ़ी राजनीतिक हलचल
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में हाल के दिनों में कई विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया था। इसके बाद 12 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं और समर्थकों ने मतदाता सूची में हुए बदलावों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच और सुरक्षा उपायों की मांग की।
इस घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और राजनीतिक विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। अब इस विवाद का असर पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी दिखाई दे रहा है, जहां तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
आगे क्या होगा?
ममता बनर्जी की रैली को लेकर सुवेंदु अधिकारी के कड़े बयान के बाद राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है। हालांकि, रैली को वास्तव में रोकने के लिए कोई औपचारिक आदेश जारी हुआ है या प्रशासन की ओर से कोई विशेष कदम उठाया गया है, इसकी पुष्टि जरूरी है। फिलहाल, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद बंगाल की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।