कोलकाता: पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में होने वाली सभी नियुक्तियां पूरी तरह पारदर्शी होंगी और भर्ती प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों की निगरानी में संपन्न कराई जाएगी।
विकास भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक
सोमवार को राज्य के शिक्षा विभाग के मुख्यालय विकास भवन में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधि, राज्य शिक्षा विभाग के चार मंत्री, शिक्षा सचिव तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया, पारदर्शिता और लंबित नियुक्तियों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
भर्ती प्रक्रिया से राजनीतिक हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त
बैठक के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने कहा कि भर्ती की पूरी जिम्मेदारी आईएएस अधिकारियों के हाथों में होगी, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद बनी रहे।
दुष्यंत नारियावाला बने स्कूल सेवा आयोग के अध्यक्ष
मुख्यमंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) के नए अध्यक्ष के रूप में पूर्व मुख्य सचिव दुष्यंत नारियावाला ने सोमवार को आधिकारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया है। मुख्य सचिव पद से मुक्त होने के बाद वह दिल्ली में राज्य के रेजिडेंट कमिश्नर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। अब उन्हें स्कूल सेवा आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मेरिट और आरक्षण के आधार पर होगी नियुक्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार योग्यता, पारदर्शिता और संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था का पूरी तरह पालन करेगी। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सहित सभी आरक्षण नियमों और रोस्टर प्रणाली का पालन करते हुए नियुक्तियां की जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप होगी।
ओबीसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार को उम्मीद है कि आगामी दिनों में सर्वोच्च न्यायालय से ओबीसी आरक्षण मामले में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसके बाद जिन लगभग छह हजार अभ्यर्थियों का साक्षात्कार पूरा हो चुका है तथा जिनकी नियुक्ति लंबित है, उन्हें भी जल्द नियुक्ति दी जाएगी।
भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नई व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके कारण लंबे समय तक नियुक्तियां बाधित रहीं। नई भाजपा सरकार बनने के बाद से ही पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया का वादा किया गया था। उन्होंने दोहराया कि सरकार अब उसी दिशा में तेजी से काम कर रही है।
ओबीसी नीति में संशोधन का दावा
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पिछली सरकार के समय ओबीसी आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने ओबीसी नीति में आवश्यक संशोधन कर उसे विधानसभा से पारित करा दिया है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया का मार्ग और अधिक स्पष्ट हो गया है।