कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकास भी, विरासत भी" के मूल मंत्र को आधार बनाकर पश्चिम बंगाल सरकार राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए एक बड़े अभियान की शुरुआत करने जा रही है। सोमवार को राज्य के सचिवालय नबन्ना (Nabanna) से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सभी जिलाधिकारियों (DM), पुलिस प्रशासन और राज्य की पारंपरिक रथयात्रा समितियों के साथ एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक की।
इस बैठक में रामकृष्ण मठ और मिशन, इस्कॉन (ISKCON) तथा भारत सेवाश्रम संघ जैसी शीर्ष आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि और संत समाज विशेष रूप से उपस्थित थे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया आयाम देने के लिए कई बड़े और ऐतिहासिक फैसलों का एलान किया।
रथयात्रा उत्सव में पहली बार सरकार की सीधी भागीदारी
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल हमेशा से अध्यात्म और संस्कृति की जननी रहा है। यह श्री रामकृष्ण देव, स्वामी विवेकानंद, चैतन्य महाप्रभु और रानी रासमणि जैसी महान आत्माओं की पवित्र भूमि है। इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार इस साल पहली बार रथयात्रा उत्सव में सीधे तौर पर सक्रिय रूप से शामिल होने जा रही है। इसके तहत दो बड़ी घोषणाएं की गईं:
75 स्थानों पर सरकारी ‘सेवा केंद्र’: माहेर और महिषादल जैसे राज्य के 75 ऐतिहासिक और पारंपरिक रथयात्रा मेला परिसरों में सूचना एवं संस्कृति विभाग द्वारा विशेष 'सेवा केंद्र' बनाए जाएंगे, जहां श्रद्धालुओं को जरूरी नागरिक सुविधाएं मिलेंगी।
60 कमेटियों को ₹5-5 लाख का अनुदान: दशकों पुरानी और पारंपरिक रूप से चली आ रही प्राथमिक रूप से ऐसी 60 रथयात्रा समितियों को 5-5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया कि इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से पुराने और लकड़ी के बने रथों के जीर्णोद्धार (रखरखाव) के लिए किया जाए।
धार्मिक बुनियादी ढांचे के लिए 1000 करोड़ रुपये का 'तीर्थक्षेत्र सर्किट'
राज्य के बजट में इस बार धार्मिक पर्यटन और प्राचीन मंदिरों के कायाकल्प पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मुर्शिदाबाद के ऐतिहासिक किरीटेश्वरी मंदिर समेत बंगाल के सभी प्राचीन व हेरिटेज मंदिरों के पुनर्निर्माण के लिए एक विशेष ‘तीर्थक्षेत्र सर्किट’ (Pilgrimage Circuit) की रूपरेखा तैयार की गई है।अगले दो वर्षों में इस सर्किट के तहत व्यापक विकास कार्य किए जाएंगे, जिसके लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने शुरुआती तौर पर 1,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड आवंटित किया है।
इसके साथ ही प्रमुख सेवा संस्थानों के लिए भी बड़े कदम उठाए गए हैं:
1. भारत सेवाश्रम संघ: संघ द्वारा संचालित अस्पतालों को अब ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत लिस्टेड (Enlisted) कर दिया गया है।
2. रामकृष्ण मिशन: मिशन द्वारा संचालित स्कूलों, विश्वविद्यालयों और कृषि विद्यालयों के विकास के प्रस्तावों को सरकार ने मंजूरी दे दी है।
3. स्वामी विवेकानंद का जन्मस्थान: कोलकाता के शिमला स्ट्रीट स्थित स्वामी जी के पवित्र पैतृक निवास के रखरखाव के लिए सरकार 5 करोड़ रुपये का एक विशेष ‘कॉर्पस फंड’ (Corpus Fund) देगी।
श्रावणी मेले में नया प्रयोग: शिवभक्तों पर होगी आसमान से पुष्पवर्षा
आगामी सावन के महीने में बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए जाने वाले जलयात्रियों (कांवड़ियों) के लिए अन्य राज्यों की तर्ज पर बंगाल में भी विश्वस्तरीय सुविधाएं दी जाएंगी। इसके तहत तीन प्रमुख धामों— जलपाईगुड़ी का जल्पेश मंदिर, भूटान सीमा पर स्थित जयंती क्षेत्र और हुगली का प्रसिद्ध तारकेश्वर धाम को विशेष रूप से विकसित किया जा रहा है।
तारकेश्वर धाम की सुंदरता और विकास के लिए 15 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। शेओड़ाफुली से तारकेश्वर तक के करीब 30 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर हर 5 किलोमीटर पर सरकारी शिविर लगाए जाएंगे, जहां विश्राम गृह, ओआरएस (ORS), शुद्ध पेयजल और मेडिकल कैंप की सुविधाएं होंगी।
सबसे बड़ा आकर्षण यह होगा कि सावन के हर सोमवार को मौसम अनुकूल रहने पर तारकेश्वर जाने वाले शिवभक्तों पर राज्य सरकार के अपने हेलीकॉप्टर से आकाश से गुलाब के फूलों की वर्षा (Pushpavarsha) की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि वे खुद 14 तारीख को तारकेश्वर धाम जाएंगे और 16 तारीख को इस्कॉन के आमंत्रण पर कोलकाता की ऐतिहासिक रथयात्रा में शामिल होंगे।