पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह फूल और घास को फ्रीज कर दिया है। इस अंतरिम आदेश के बाद दोनों गुटों में से कोई भी उपचुनाव में एआईटीसी नाम और फूल-घास चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। यह फैसला ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुटों के बीच चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच आया है। दोनों पक्षों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है लेकिन ऋतब्रत बनर्जी इस फैसले से खुश नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग के इस कदम ने पार्टी के अंदरूनी संघर्ष को और अधिक उजागर कर दिया है।
ऋतब्रत बनर्जी का ममता पर करारा हमला
ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक पार्टी कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक पार्टी का कोई वारिस नहीं हो सकता। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में तानाशाही की कोई जगह नहीं है। ऋतब्रत ने आगे कहा कि पार्टी में परिवारवाद की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। चिन्ह और नाम को लेकर चल रहे नैरेटिव पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। उनके अनुसार यह फैसला पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत है। ऋतब्रत बनर्जी का यह बयान ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है।
चुनाव आयोग के सामने दोनों गुटों की सुनवाई
गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुटों ने अलग-अलग चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की थी। आयोग ने दोनों पक्षों की अलग-अलग सुनवाई की। ममता गुट ने किसी भी अंतरिम आदेश का विरोध किया जबकि ऋतब्रत गुट ने उपचुनाव से पहले चिन्ह के मामले में जल्द निर्णय लेने की मांग की थी। ऋतब्रत गुट में चंद्रिमा भट्टाचार्य, अकरुल जमान, अरूप रॉय और एक वकील शामिल हैं। सभी ने आयोग के सदस्यों से मुलाकात कर अपनी बात रखी। सुनवाई के बाद ही आयोग ने चिन्ह फ्रीज करने का अंतरिम आदेश जारी किया।
उपचुनाव को लेकर चिन्ह विवाद क्यों गरमा
नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने वाले हैं और दोनों गुटों की ओर से उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं। यही वजह है कि चुनाव चिन्ह का मुद्दा इतना अहम हो गया। दोनों गुट अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ मैदान में हैं और चिन्ह के बिना चुनाव लड़ना चुनौतीपूर्ण होगा। ऋतब्रत बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि चिन्ह का मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि उपचुनाव नजदीक हैं। पार्टी के आधिकारिक चिन्ह के बिना दोनों पक्षों को नई रणनीति बनानी होगी। इस विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
कांग्रेस का चुनाव आयोग और भाजपा पर हमला
तृणमूल कांग्रेस के चिन्ह फ्रीज किए जाने पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि भाजपा ने असंवैधानिक तरीके से कब्जा कर लिया और अब चुनाव आयोग ने एआईटीसी के नाम और चिन्ह को फ्रीज कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खड़े थे उनकी मदद आयोग ने बगावत के लिए की है। केसी वेणुगोपाल के अनुसार यह लोकतंत्र को धीरे-धीरे खत्म करने का एक जरिया है। कांग्रेस के इस बयान ने पूरे विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आगे और उलझने की आशंका जताई जा रही है।