कोलकाता: पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर से सांसद और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। डायमंड हार्बर और बिष्णुपुर थाने में पहले से दर्ज दो एफआईआर (FIR) के बाद अब 'सेवाश्रय' स्वास्थ्य शिविर में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर उनके खिलाफ एक और नई शिकायत दर्ज की गई है। इस बार मामला पारुलिया कोस्टल थाने में दर्ज कराया गया है।
यह नई शिकायत भाजपा नेता अभिजीत दास (बॉबी) ने दर्ज कराई है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी और उनके करीबियों पर 'सेवाश्रय' परियोजना के नाम पर करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में न केवल पैसों की हेराफेरी, बल्कि शिविर में इस्तेमाल की गई दवाओं की गुणवत्ता पर भी बड़े सवाल उठाए गए हैं।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का सख्त रुख
इस पूरे मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि कानून अपना काम करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा: "शिकायत आई है और मैंने इसे देखा है। पुलिस इस मामले की पूरी जांच करेगी। इस जांच में जिला मजिस्ट्रेट (DM) या स्वास्थ्य विभाग से जो भी मदद लेनी होगी, ली जाएगी। यह एक अपराध है, और अगर अपराध हुआ है, तो उसे देखने और उचित कार्रवाई करने के लिए जो भी जरूरी कदम उठाने होंगे, उठाए जाएंगे।"
दवाओं को जमीन में गाड़ने का सनसनीखेज आरोप
भाजपा नेता अभिजीत दास का आरोप है कि 'सेवाश्रय' परियोजना में बड़े पैमाने पर एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) दवाओं का खेल चल रहा था। उन्होंने बताया कि बीते 10 जून को सरिशा के हिंचाबेड़िया इलाके में जमीन खोदकर करोड़ों रुपये की भारी मात्रा में दवाएं बरामद की गई थीं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस की मौजूदगी में इन दवाओं को जमीन से निकाला था। पारुलिया थाना पुलिस ने दवाओं के नमूने तो इकट्ठा किए, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया था। बॉबी का दावा है कि जमीन के नीचे से मिली यह दवाएं ही 'सेवाश्रय' में हुए करोड़ों के घोटाले का सबसे बड़ा सबूत हैं।
इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत
पारुलिया कोस्टल थाने में दर्ज कराई गई इस नई शिकायत में अभिषेक बनर्जी के अलावा कई हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं, जिनमें:
सुमित राय (अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक)
जहांगीर खान
शामिम अहमद
तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट (DM) और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी
चौतरफा घिरे अभिषेक बनर्जी
सांसद अभिषेक बनर्जी पहले से ही केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED और CBI) के रडार पर हैं। इसके अलावा, हाल ही में हुए सिग्नेचर जालसाजी मामले और डीजे टिप्पणी विवाद ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। अब 'सेवाश्रय' को लेकर एक के बाद एक दर्ज हो रही एफआईआर ने उनकी राजनीतिक और कानूनी परेशानियां और ज्यादा बढ़ा दी हैं। दूसरी तरफ, मामला तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया है और विभाग के स्तर पर भी इस पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।