अहमदाबाद: गुजरात सरकार के राज्यव्यापी ‘नमो स्वच्छता अभियान’ के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बड़े स्तर पर सफाई अभियान चलाया गया है। इस अभियान के दौरान 5 लाख से अधिक अनुपयोगी सामान हटाया गया, जिससे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में 1,677 कमरे खाली हुए हैं। इन कमरों का उपयोग अब मरीजों की सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में यह अभियान 1 जुलाई से 7 जुलाई तक राज्य के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में संचालित किया जा रहा है। इसमें सब-सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों को शामिल किया गया है।
12 हजार से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों में चला अभियान
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य के 12,000 से अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कुल 5,49,897 अनुपयोगी वस्तुओं की पहचान की गई। इनमें से 5,03,329 वस्तुओं का निपटारा किया जा चुका है, जबकि शेष सामान को निर्धारित प्रक्रिया के तहत हटाया जा रहा है।
34 हजार से ज्यादा उपकरणों की हुई मरम्मत
अभियान के दौरान केवल कबाड़ हटाने का ही काम नहीं हुआ, बल्कि 34,166 मेडिकल उपकरणों और अन्य वस्तुओं की मरम्मत भी की गई। इसमें लकड़ी और लोहे के फर्नीचर, एंबुलेंस, सरकारी वाहन, इलेक्ट्रॉनिक एवं आईटी उपकरणों के साथ चिकित्सा उपकरण भी शामिल हैं।
अस्पतालों में बढ़ेंगी सुविधाएं
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि खाली हुए कमरों का उपयोग मरीजों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने, नई स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करने और अस्पतालों की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा। अभियान के तहत अस्पताल परिसरों की साफ-सफाई, सुरक्षित पेयजल व्यवस्था, फायर सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल सुरक्षा जांच, फर्नीचर मरम्मत, छोटे निर्माण कार्य और संक्रमण नियंत्रण जैसे कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
7 जुलाई को होगा अभियान का समापन
‘नमो स्वच्छता अभियान’ की शुरुआत मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर स्थित GMERS ऑडिटोरियम से स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया की मौजूदगी में की थी। यह विशेष अभियान 7 जुलाई को संपन्न होगा। सरकार का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित और मरीजों के अनुकूल बनाना है।