कोलकाता डेस्क: देशभर में आज यानी 8 नवंबर को दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है। आमतौर पर रविवार और सार्वजनिक छुट्टियों के दिन शेयर बाजार बंद रहता है, लेकिन इस बार दिवाली के मौके पर निवेशकों को एक खास अवसर मिलने जा रहा है। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख एक्सचेंज NSE और BSE रविवार को भी विशेष ट्रेडिंग सत्र के लिए खुलेंगे। इस दौरान निवेशक केवल 1 घंटे 10 मिनट तक शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकेंगे। इस विशेष सत्र को 'मुहूर्त ट्रेडिंग' कहा जाता है, जिसका भारतीय शेयर बाजार में धार्मिक और पारंपरिक महत्व है।
8 नवंबर को होगी मुहूर्त ट्रेडिंग
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने दिवाली लक्ष्मी पूजन के अवसर पर 8 नवंबर 2026, रविवार को मुहूर्त ट्रेडिंग आयोजित करने का फैसला किया है। इक्विटी बाजार में सामान्य कारोबार दोपहर 2:20 बजे से शुरू होकर 3:30 बजे तक चलेगा। यानी निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए कुल 70 मिनट का समय मिलेगा।
इससे पहले दोपहर 2:05 बजे से 2:20 बजे तक प्री-ओपन सेशन आयोजित किया जाएगा। इस दौरान बाजार खुलने से पहले ऑर्डर दर्ज करने और उनमें जरूरी बदलाव करने की सुविधा मिलेगी। हालांकि, अलग-अलग ट्रेडिंग सेगमेंट के लिए समय में अंतर हो सकता है।
क्यों खास होती है मुहूर्त ट्रेडिंग?
मुहूर्त ट्रेडिंग सिर्फ शेयरों की खरीद-बिक्री का एक छोटा सत्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय कारोबारी परंपरा से जुड़ी एक खास रस्म भी है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, दिवाली को मां लक्ष्मी की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना का पर्व माना जाता है। इसी विश्वास के साथ निवेशक इस शुभ अवसर पर नए निवेश की शुरुआत करना पसंद करते हैं।
शेयर बाजार में मुहूर्त ट्रेडिंग को नए हिंदू संवत की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। व्यापारी और निवेशक इस दौरान प्रतीकात्मक रूप से शेयर खरीदकर आने वाले कारोबारी वर्ष में आर्थिक उन्नति और समृद्धि की कामना करते हैं। कई निवेशक इस मौके पर अपने पोर्टफोलियो में नई कंपनियों के शेयर शामिल करते हैं, जबकि कुछ लोग परंपरा निभाने के लिए छोटी खरीदारी करते हैं।
1957 से चली आ रही है यह परंपरा
मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा भारतीय शेयर बाजार में कई दशकों पुरानी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने वर्ष 1957 में इसकी शुरुआत की थी। इसके बाद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भी वर्ष 1992 से इस परंपरा को जारी रखा। तब से हर साल दिवाली के अवसर पर विशेष ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया जाता है।
पुराने समय में व्यापारी दिवाली के दिन अपने नए बही-खाते खोलते थे। इस परंपरा को 'चोपड़ा पूजन' कहा जाता है। व्यापारी अपने खातों और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की पूजा करते थे और नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत शुभ मुहूर्त में करते थे। धीरे-धीरे यही परंपरा शेयर बाजार से भी जुड़ गई।
ट्रेडिंग से पहले इन बातों को समझना जरूरी
मुहूर्त ट्रेडिंग का समय भले ही सीमित होता है, लेकिन इस दौरान किए गए सौदों को सामान्य कारोबारी दिनों की तरह ही गंभीरता से लेना जरूरी है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस सत्र में किए गए सभी सौदों पर सेटलमेंट से जुड़े नियम लागू होंगे।
बाजार की रौनक और त्योहार का उत्साह देखकर जल्दबाजी में निवेश करना सही रणनीति नहीं है। किसी भी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार, वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी है। खासकर नए निवेशकों को केवल शुभ मुहूर्त के भरोसे जोखिम भरे फैसले लेने से बचना चाहिए।
10 नवंबर को बंद रहेगा शेयर बाजार
दिवाली के अवसर पर 8 नवंबर को विशेष मुहूर्त ट्रेडिंग के लिए बाजार खुलेगा, लेकिन 10 नवंबर 2026 को दिवाली-बालिप्रतिपदा के कारण NSE और BSE में नियमित कारोबार बंद रहेगा। ऐसे में निवेशकों को बाजार की छुट्टियों और ट्रेडिंग सेशन के समय को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार करनी चाहिए।
मुहूर्त ट्रेडिंग भारतीय शेयर बाजार की उस परंपरा का प्रतीक है, जहां आधुनिक निवेश व्यवस्था और सदियों पुरानी कारोबारी मान्यताएं एक साथ दिखाई देती हैं। यही वजह है कि हर साल दिवाली पर होने वाला यह छोटा-सा ट्रेडिंग सत्र निवेशकों के लिए खास आकर्षण बना रहता है।